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सरकारी स्कूली बच्चों से मिलीं मेलानिया ट्रम्प, कहा यहां के टीचर्स का लगन देख अच्छा लगा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने परिवार के साथ दो दिन के भारत दौरे पर आए हैं। कल वह करीब दोपहर 12 बजे सरदार वल्लभ भाई पटेल हवाई अड्डे पर पहुंचे। आज दूसरे दिन वह दिल्ली में हैं। आज दोपहर के बाद भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो सकता है। वहीं उनकी पत्नी मलेनिया ट्रम्प ने आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा किया।

मेलानिया ट्रम्प लगभग 12 बजे के आसपास दिल्ली के मोतीबाग के सर्वोदय विद्यालय पहुंचीं। उनके स्कूल पहुंचने पर बच्चों ने बुके देकर उनका स्वागत किया। उसके बाद उन्होंने बच्चों से बात की। उन्होंने इस दौरान  दिल्ली के स्कूलों में चल रहे हैप्पीनेस क्लास के बारे में भी विस्तार से जानने की कोशिश की।

मेलानिया ट्रंप ने बच्चों से मिलने के बाद खुशी की इजहार किया। मेलानिया ने कहा, “नमस्ते, यह मेरा पहला भारत दौरा है। मैं शब्दों का चयन नहीं कर सकती। यहां के लोग बहुत मिलनसार और दयालू हैं। मैं और राष्ट्रपति यहां आकर खुश हैं। सर्वोदय का अर्थ होता है सबके लिए समृद्धि और उन्नती। यहां टीचर्स की मेहनत और बच्चों का समर्पण और लगन साफ नजर आता है। यह बहुत शानदार स्कूल है। मैंने हैप्पीनेस क्लास में पाठ्यक्रम का जायजा लिया। ऐसे कार्यक्रम दुनिया के प्रेरणा बन सकते हैं। हमारे बेहतरीन स्वागत के लिए आपका शुक्रिया।”

उनके स्कूल दौरे से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने एक ट्वीट किया और दिल्ली के सरकारी स्कूलों को बधाई दी है। उन्होंने लिखा, “हमें खुशी है कि अमेरिका की फर्स्ट लेडी हमारे स्कूल में आ रही हैं। हमारे शिक्षकों, छात्रों और दिल्लीवालों के लिए बहुत बड़ा दिन है। सदियों से भारत ने दुनिया को आध्यात्मिकता सिखाई है। मुझे खुशी है कि वह हमारे स्कूल से खुशी का संदेश लेकर वापस जाएंगी।”

दिल्ली के रकारी स्कूलों में यह करीब डेढ़ साल से हैप्पीनेस क्लासेस शुरू किए गए हैं। इसके अंतर्गत प्रतिदिन बच्चों को एक स्पेशल क्लास दी जाती है जिसका नाम हैप्पीनेस क्लास रखा गया।

सरकारी स्कूली बच्चों से मिलीं मेलानिया ट्रम्प, कहा यहां के टीचर्स का लगन देख अच्छा लगा

इस क्लास का मकसद है कि बच्चों में सकारात्मकता पैदा करना है। यह हैप्पीनेस क्लास 45 मिनट की होती है। इसमें नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चों को शामिल किया जाता है। इस क्लास में बच्चों को ध्यान कराया जाता है और इसमें किसी भी तरह की कोई प्रार्थना नहीं होती है।

इस क्लास में न तो कोई मंत्र बोला जाता है और न ही किसी देवी-देवता की पूजा की जाती है। इसमें अपनी सांसों पर ध्यान देने को कहा जाता है जिससे बच्चों का दिमाग शांत किया जा सके। यह भारत में ध्यान लगाने की बहुत पुरानी संस्कृति है। दिल्ली सरकार के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया कहते है कि हैप्पीनेस करिकुलम से बच्चों में बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

मेडिटेशन करने से बच्चों में ध्यान लगाने की आदत पड़ती है। इससे बच्चे पढ़ाई पर अच्छी तरह से फोकस कर पाते हैं। बच्चे जब पढ़ने बैठते हैं तो उनका ध्यान भटकता नहीं है। हैप्पीनेस क्लास में शामिल होने से बच्चों में संस्कारों के प्रति जागरूकता आती है। इससे बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान की भावना पैदा होती है। बताया जाता है कि अभिभावकों ने दावा किया है हैप्पीनेस क्लास में शामिल होने के बाद बच्चों में झगड़े होने कम हो गए हैं।

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