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किंगमेकर बनना चहती हैं मायावती

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को लग रहा है कि यदि उनकी पार्टी मध्य प्रदेश, छत्तीस गढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में एससी-एसटी वोट बैंक को अपने पक्ष में गोलबंद करने में कामयाब रही तो वह इन राज्यों में किंगमेकर की भूमिका में होगी। लिहाजा पार्टी उन सीटों पर विशेष जोर दे रही है जहां एससी-एसटी वोट अधिक संख्या में हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा के किंगमेकर बनने की संभावनाएं क्षीण हैं, लेकिन उसकी सक्रियता सत्तारुढ़ भाजपा के लिए चिंता का कारण हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मध्य परदेश में 15 प्रतिशत दलित वोटर हैं। बसपा इन्हीं वोटों के बूते अपना दमखम दिखा रही है, लेकिन सच यही है कि पार्टी यूपी की तरह दूसरे राज्यों में इन वोटों को प्रभावित करने में सफल नहीं रही है। हालत यह है कि 2008 में मध्य प्रदेश में उसे जो 9.08 प्रतिशत मत मिले थे वह 2013 में घटकर 6.29 प्रतिशत ही रह गए। उसका ग्राफ बढ़ा नहीं बल्कि गिरा है, लेकिन दिक्कत यह है कि यदि वह वोट काटती है तो कांग्रेस के मुकाबले इसका ज्यादा नुकसान भाजपा को होगा क्योंकि जिन सीटों पर बसपा संभावनाएं तलाश रही है, उनमें से अधिकांश भाजपा के कब्जे में हैं।
 मध्य प्रदेश जैसी ही स्थिति छत्तीसगढ़ में भी है। राज्य में एससी-एसटी के लिए 39 सीटें आरक्षित हैं। एससी के लिए आरक्षित 10 में से 9 सीटें अभी भाजपा के पास हैं। ऐसे में हाथी यदि आगे बढ़ा तो नुकसान भाजपा को ही होगा। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां बसपा और अजीत जोगी का गठबंधन कांग्रेस के मुकाबले भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण है। लेकिन दूसरी ओर कुछ विश्लेषक मानते हैं कि एससी -एसटी वोट बैंक की 18 सीटों पर अभी कांग्रेस काबिज है। लिहाजा मायावती और जोगी का गठबंधन कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।
राजस्थान में  बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2008 के विधानसभा चुनाव में रहा जब उसने 7.60 प्रतिशत वोट हासिल करने के साथ छह सीटें जीती। लेकिन बाद के वर्षों में यहां उसका ग्राफ इस तरह गिरा कि 2013 में उसने राज्य की 200 में से 195 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन जगह उसे जीत भी मिली, लेकिन उसका वोट प्रतिशत घटकर 3.37 प्रतिशत रह गया। राज्य में एससी की 34 और एसटी की 25 सीटें हैं। राज्य में एससी की 34 और एसटी की 25 सीटें हैं। यही वजह है कि कांग्रेस यहां बसपा से गठबंधन करना चाहती थी, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बन सकी। जिस पर बसपा नेताओं का दो टूक मानना है कि गठजोड़ सिरे नहीं चढऩे का नुकसान अंतत: कांग्रेस को ही होगा, बसपा पर उसका कोई असर नहीं होने जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा राजस्थान में भले ही कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों के वोट काटे, लेकिन इतनी सीटें नहीं ला सकती है कि किंगमेकर बनने की पार्टी सुप्रीमो की इच्छा पूरी हो जाए।

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