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कोविशील्ड के निर्यात में देरी से निराश कई देश

कोरोना महामारी ने विश्वभर में अभी भी कोहराम मचा रखा है। दुनियाभर के कई देश अब तक इसके दंश को झेल रहे हैं। कोरोना के इस दंश से निकलने के लिए हर देश इस समय कोरोना वैक्सीन की ज्‍यादा से ज्‍यादा खुराक चाहता है। लेकिन वैक्सीन बनने के बाद भी कई देश ऐसे हैं जो इसे खरीद पाने में समर्थ नहीं हैं। उनके यहां न तो वैक्सीन बन रही है और न ही उनका इतना बजट है कि अमेरिकी, चीनी या अन्य देशों से वैक्सीन खरीद सकें। ऐसे देशों के लिए भारत एक मसीहा के रूप में आगे आया है।

भारत ने अब तक छोटे और गरीब देशों को अपने यहां बनी ऑक्सफर्ड-एस्‍ट्राजेनेका वैक्‍सीन ‘कोविशील्‍ड’ की खेप तोहफे के रूप में भिजवाई है। इस समय भारत पाकिस्तान, नेपाल सहित कई देशों को वैक्सीन मुहैया करा रहा है। लेकिन अब यूनिसेफ ने कहा है कि ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्युनाइजेशन (GAVI) समझौते के अनुसार, भारत द्वारा जो कोरोना वैक्सीन की खेप मार्च और अप्रैल में मिलने वाली थी अब उसकी आपूर्ति में देरी होने के आसार है।

यूनिसेफ ने कहा, ‘हम समझते हैं कि कोवैक्‍स (COVAX) सुविधा में दी जाने वाली कोविड-19 (COVID-19) टीकों की आगे की खुराक के लिए निर्यात लाइसेंस हासिल करने में झटका लगने के बाद कोवैक्‍स सुविधा में भाग लेने वाली निम्न-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं को कोविड-19 टीके की डिलीवरी में देरी की संभावना होगी।

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दरअसल, भारत में तेजी से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति भयंकर हैं। इसलिए भारत सरकार द्वारा वैक्सीन की घरेलू मांग पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय किया गया है। अभी दो-तीन महीने तक वैक्सीन के निर्यात के दायरे को बढ़ाया नहीं जाएगा। हालांकि, पहले से निर्धारित और व्यावसायिक करार को पूर्ण किया जाएगा।

इस महामारी से उबरने में भारत अभी भी दूसरे देशों की सहायता जारी रखेगा। भारत ने अब तक लगभग 80 देशों को कोरोना वैक्सीन की 6.04 करोड़ डोज की आपूर्ति की है। इनमें से कुछ डोज भारत की तरफ से मदद के तौर पर भेजी गई है। जबकि, कुछ वैक्सीन व्यावसायिक करार और कुछ कोवैक्स के तहत निर्यात की गई हैं। COVAX योजना का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक दो बिलियन खुराक वितरित करना है, ताकि कम आय वाले देशों की 27 प्रतिशत आबादी को बिना किसी लागत के टीकाकरण किया जा सके। कोवैक्स एक संयुक्त राष्ट्र समर्थित अंतरराष्ट्रीय पहल का नाम है जिसका मकसद सभी देशों के बीच कोरोना वैक्सीन का समान वितरण करना है।

COVAX योजना के तहत मई के अंत तक लगभग 238 मिलियन खुराक दी जानी थी। जिसमें भारत और दक्षिण कोरिया में निर्मित एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन की 237 मिलियन खुराक शामिल थी। कुछ अमीर देश भी SII पर भरोसा कर रहे हैं। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ‘कोविशिल्ड’ बनाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता है। कंपनी पहले ही कह चुकी है कि वह जो भी खुराक बनाएगी उसका आधा हिस्सा भारत के लिए होगा और बाकी COVAX के लिए। COVAX कम और मध्यम आय वाले देशों में भी टीका उपलब्ध कराने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक पहल है।

यहां अभी भेजी जानी है वैक्‍सीन

अफगानिस्‍तान – 5 लाख डोज

निकारगुआ – 2 लाख डोज

मंगोलिया – 1.5 लाख डोज

बारबेडोज – 1 लाख डोज

डॉमिनिका – 70 हजार डोज

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