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मामी इंदिरा और ओवैसी ने बिगाड़ा तेजस्वी का सियासी खेल

बिहार की मोकामा और गोपालगंज विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। मोकामा सीट पर राजद उम्मीदवार नीलम देवी ने जीत दर्ज की तो वही गोपालगंज में भाजपा उम्मीदवार कुसुम देवी ने राजद प्रत्याशी मोहन प्रसाद गुप्ता को 1794 वोटों के मामूली अंतर से हरा दिया है,जो चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है।

 

गोपालगंज में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाकर उतारा था। जिसको लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को चुनाव जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक रिपोर्ट के मुताबिक,एआईएमआईएम उम्मीदवार अब्दुल सलाम को 12214 वोट मिले जो भाजपा उम्मीदवार कुसुम देवी के जीत के अंतर से करीब सात गुना ज्यादा है। भाजपा की कुसुम देवी को 70053 (41.6%) वोट मिले, जबकि आरजेडी के मोहन प्रसाद गुप्ता को 68259 (40.53%) वोट मिले है। एआईएमआईएम के अब्दुल सलाम को 12214 (7.25%) वोट प्राप्त हुए। इन सब को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ओवैसी ने गोपालगंज में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा होता तो भाजपा इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाती, जैसा कि चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है। इसके अलावा एक और दिलचस्प फैक्ट यह है कि लालू प्रसाद के साले साधु यादव ने भी राजद को नुकसान पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। साधु यादव की पत्नी इंदिरा यादव यानी उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मामी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर गोपालगंज से चुनाव लड़ा और उन्हें 8854 (5.26%) वोट मिले, जो कुसुम देवी के जीत के अंतर से भी लगभग पांच गुना ज्यादा हैं।

इतना ही नहीं गोपालगंज विधानसभा चुनाव को लेकर अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने सीमांचल में 5 विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी,लेकिन बाद में 4 विधायक को राजद ने अपने शामिल कर लिया था। इसलिए यह हार विधायकों के तोड़फोड़ का बदला भी माना जा रहा है।निर्वाचन आयोग के आकड़ो से पता चलता है कि एआईएमआईएम ने राजद को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया, वरना भाजपा चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो पाती है।

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