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मैना को जेल जाना ही था, बाकी सब तो हनी ट्रैप में व्यस्त हैं!

प्रदेश में सब हनी ट्रैप में व्यस्त हैं।इसी बीच 12 साल की मैना को जेल  भेज दिया गया। मैना पर यह इल्जाम लगा कि उसने पहाड़ी पर बने दुर्गा माता मंदिर की दान पेटी से 250 रुपए चुरा लिए। सीसीटीवी कैमरे में मैना का यह बड़ा अपराध कैद हो गया और मंदिर कमेटी ने कैमरे के वीडियो फुटेज देख मेले-कुचेले लाल कपड़ों में पैसे चुराती मैना की रहली थाने में रिपोर्ट लिखा दी।
अब मैना, माल्या या नीरव मोदी की तरह विदेश तो भाग सकती नहीं थी, लिहाजा पुलिस ने उसे धरदबोचा और अपने प्रेस नोट में उसकी गिरफ्तारी की खबर मीडिया को दी। मैना के घर से 10 किलो गेहूं जो उसने अपने बूढ़े माँ-बाप और दो छोटे भाइयों की भूख मिटाने के लिए खरीदा था वह जब्त हुआ।यह गेहूं उसने कस्बे की दुकान से 180 रुपए में खरीदा और बचे 70 रुपए पुलिस ने उसके स्कूल के बस्ते से जब्त किए।आईपीसी की धारा 454 और 380 में मैना को पुलिस ने गृह भेदन और चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
मैना मध्यप्रदेश के सागर जिले के रहली गांव में रहती है और छठी क्लास में पढ़ती है।
एक पक्के मकान की दीवार से सटी उसकी झोपड़ी है, जिसमें 4-6 बर्तन और ईंटों पर रखा चूल्हा और थोड़े-बहुत फटे-पुराने कपड़े टंगे पुलिस को मिले।मैना को पहले रहली थाने में, उसके
बाद 45 किलोमीटर दूर सागर स्थित जिला मुख्यालय लाया गया, जहां पर किशोर न्यायालय में सुनवाई इसलिए नहीं हो सकी कि साहब लोग छुट्टी पर थे। फिर उसे सागर से लगभग साढ़े तीन किमी दूर शहडोल के बालिका सुधार गृह में भेज दिया।मैना का गरीब बाप न तो शहडोल जा सका और न वकील कर सका।12 साल की मैना भी यह नहीं समझ सकी कि पेट की आग बुझाने के लिए उसने 250 रुपए चुराने का बड़ा-भारी जुर्म किया है।संयोग से अभी नवरात्रि चल रही है, जिसमें मैना जैसी कई लड़कियों को अष्टमी और नवमी पूजने के बाद पैर पूजते हुए खाना खिलाया जाता है।
कन्या पूजन की इस रस्म के लिए भी शहरों में कन्याएं आसानी से नहीं मिलती। यह बात अगर मैना को पता होती तो वह शहर की किसी पॉश कॉलोनी या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में आ जाती।
हालांकि उसने चोरी अपने परिवार के लिए की थी।मंदिर समिति से लेकर स्थानीय पुलिस और किशोर न्यायालय का रवैया मैना के लिए भले ही निंदनीय रहा हो, मगर कुछ स्थानीय और सोशल मीडिया पर घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मैना के परिवार को एक लाख रुपए की मदद करने के साथ कलेक्टर को अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने के निर्देश दिए और यह भी कहा कि कई बार जीवन यापन के दबाव में मासूम गलत राह पकड़ लेते हैं।

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