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नई दिल्ली। यौन शोषण के आरोपों में घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ जिस तरह हमले तेज हो रहे हैं, उससे लगता है कि देर-सबेर उन्हें अपने पद से हटना पड़ सकता है।  हालांकि अकबर ने मीडिया के माध्यम से अपने खिलाफ लगे आरोपों पर सफाई दे दी है। लेकिन बताया जाता है कि जल्दी ही वे अपने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष भी सफाई देंगे। इसी दौरान उन्हें निर्देश मिल सकता है कि वे खुद नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दें।
  विदेश से लौटने के बाद अकबर ने मीडिया में सफाई दी है। यह सवाल भी उठाया कि आखिर दशकों बाद यौन शोषण का आरोप लगाने का मतलब क्या है। उन्होंने आरोप लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। जाहिर है कि अपनी तरफ से उन्होंने पूरी तरह खुद के पाक साफ होने का संदेश दिया है। लेकिन विरोध का जो महौल अकबर के खिलाफ बन रहा है। खासकर सोशल मीडिया पर उनके बहाने सरकार पर जो तीखे हमले हो रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि शीर्ष नेतृत्व उन्हें पद छोड़ने को कह सकता है। सूत्रों के मुताबिक नेतृत्व उन्हें सीधे- सीधे हटाने के बजाए सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे वाले मुहावरे पर अमल करना चाहता है। नेतृत्व उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद ही पद छोड़ने की घोषणा करने का निर्देश दे सकता है। इसका संदेश यह जाएगा कि अकबर तो पाक साफ हैं, लेकिन आरोप लगने पर नैतिकता का पालन कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अकबर के खिलाफ आरोपों का सिलसिला शुरू होते ही शीर्ष नेतृत्व ने उनके भविष्य को लेकर गंभीर मंथन किया था। उस समय तक एमजे की कुर्सी बचती दिख रही थी। लिहाजा शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले में इंतजार करने का फैसला किया था। मगर बाद में आरोपों का सिलसिला तेजी से आगे बढ़ा और उनकी स्थिति कमजोर होती चली गई। खास बात यह है कि अकेले विपक्ष की ओर से ही अकबर के इस्तीफे की मांग नहीं हो रही है, बल्कि सरकार में शामिल कई महिला मंत्री भी मुखर हैं। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने तो सार्वजनिक तौर पर आरोपों की जांच की सलाह दी है। दूसरी वरिष्ठ मंत्री स्मृति ईरानी ने मी टू अभियान मामले में महिलाओं के साहस की प्रशंसा की है।

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