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कहीं खाकी से तो नहीं जुडे़ हैं हत्याकांड के तार

तो क्या मधुर सम्बन्धों और चेम्बर के विवाद ने ले ली दरवेश यादव की जान या फिर इलाके के चर्चित इंस्पेक्टर सतीश यादव का इस लोमहर्षक हत्याकांड से सीधा सम्बन्ध था? प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं में से कुछ का कहना है कि इंस्पेक्टर सतीश यादव को देखते ही हत्यारा मनीष क्रोध से आग बबूला हो गया था। कुछ ही क्षणों पश्चात उसने बार काउंसिल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरवेश यादव के शरीर में 5 गोलियां उतार दीं। हालांकि अबूझ पहेली बन चुके इस हत्याकांड को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं लेकिन दावा यह भी किया जा रहा है कि हत्याकांड की सच्चाई इसी के आस-पास मंडरा रही है। पुलिस भी इन्हीं बिन्दुओं के आधार पर घटना की सच्चाई पता लगाने में जुटी है। अधिवक्ता मनीष बाबू शर्मा और मृतका दरवेश यादव के बारे में कहा जाता है कि दोनों का आपसी तालमेल काफी अच्छा था। दोनों ही एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ रहे। यहां तक कि बार काउंसिल के चुनाव में भी मनीष ने दरवेश यादव की काफी मदद की थी। चंदा जुटाने से लेकर प्रचार करने में मनीष हमेशा आगे रहा। दरवेश के जीतने पर भी मनीष बेहद खुश था। दावा किया जा रहा है कि यदि जांच अधिकारी इन्हीं बिन्दुओं को केन्द्र में रखकर जांच करें तो निश्चित तौर पर सफलता हाथ लगेगी।
ज्ञात हो हत्यारे मनीष बाबू शर्मा ने दरवेश यादव पर गोलियां दागने के पश्चात आत्महत्या के इरादे से एक गोली स्वयं मार ली थी। मनीष का अस्पताल में इलाज चल रहा है। यदि मनीष ठीक होकर अस्पताल से बाहर आता है तो निश्चित तौर पर सच्चाई पर से पर्दा अपने आप उठ जायेगा, तब तक कयासों और संगी साथियों के बयान के आधार पर ही हत्याकांड के पीछे का मकसद जाना जा सकता है।
घटना के समय मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस की पड़ताल के दौरान बताया कि दरवेश यादव अधिवक्ता डाॅक्टर अरविन्द मिश्रा के साथ अपने चैम्बर में बैठी हुई थीं। चाय-नाश्ते के साथ जीत की खुशी मनायी जा रही थी। वहां पर मैनपुरी में तैनात इंस्पेक्टर सतीश यादव भी मौजूद थे। दरवेश की जीत की खुशी के मौके पर उनकी भतीजी कंचन यादव, मौसेरा भाई मनोज यादव के साथ कई अन्य लोग भी मौजूद थे। इसी बीच अधिवक्ता मनीष बाबू शर्मा भी चैम्बर में आए और वहां पर इंस्पेक्टर सतीश यादव को बैठे देखकर वापस लौट गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ठीक 10 मिनट पश्चात अधिवक्ता मनीष बाबू शर्मा दोबारा चैम्बर में आया। उस वक्त तक इंस्पेक्टर सतीश यादव जा चुके थे। मनीष ने दरवेश यादव से तल्ख लहजे में इंस्पेक्टर सतीश यादव की मौजूदगी के बारे में पूछा कि वह यहां क्यों आया था? उसे किसने बुलाया था? दरवेश कोई जवाब दे पाती इससे पहले ही मनीष उसे भद्दी-भद्दी गालियां देने लगा। पास में ही बैठे अधिवक्ता मनोज यादव ने उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन इसी बीच मनीष ने कमर में खोंसी हुई रिवाल्वर बाहर निकाल ली। मनोज ये सब देखकर डर कर बैठ गया। इसके बाद मनीष ने बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की तरफ रिवाल्वर तानकर 4 फायर कर दिए। दरवेश वहीं गिर पड़ी। इसके बाद मनीष ने स्वयं को भी गोली मार ली। आनन-फानन में साथी अधिवक्ताओं ने दरवेश यादव और मनीष बाबू शर्मा को अस्पताल पहुंचाया, जहां दरवेश को डाॅक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इस लोमहर्षक हत्याकांड की जांच एडीएम सिटी केपी सिंह को सौंपी गयी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच रिपोर्ट 10 दिनों में मांगी है। डीएम ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलुओं को खंगाला जायेगा। दूसरी ओर स्थानीय पुलिस भी अपने स्तर से जांच में जुटी है।
फिलहाल इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में शक की सुई मैनपुरी में तैनात इंस्पेक्टर सतीश यादव के साथ ही बार काउंसिल के सह विजेता हरिशंकर सिंह पर टिकी हुई है। चूंकि मामला अधिवक्ताओं के बीच का ही है लिहाजा पुलिस बेहद सहजता के साथ इस मामले की पड़ताल में लगी है। जहां तक जांच में लगी पुलिस की बात है तो उसका भी यही मानना है कि हत्याकांड की वजह अधिवक्ता मनीष बाबू शर्मा, मैनपुरी में तैनात इंस्पेक्टर सतीश यादव और सह विजेता हरिशंकर के आस-पास ही है। चूंकि मामला वकीलों का है लिहाज वह खुलकर न तो वकीलों का बयान ले पा रही है और न ही किसी पर दबाव।

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