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माल्या को भारत लाने में फंसा कानूनी पेंच

केंद्र सरकार ने 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट को कहा कि भारत के जाने-माने शराब व्यापारी भगोड़ा विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए सभी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। ब्रिटेन कानून के तहत कानूनी मुद्दों को हल किए बगैर सौंपा नहीं जा सकता। केंद्र सरकार का कहना था कि कई कानूनी और मसलों के चलते ही इस मामले में देरी हो रही है। केंद्र सरकार की सभी दलीलों को सुनने के बाद सालिसिटर जनरल तुषार मेहता की तरफ से माल्या के प्रत्यर्पण की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ और वक्त मांगा गया है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस यूयू ललित और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने इस मामले की सुनवाई 15 मार्च तक के लिए मुकर्रर की है। केंद्र की ओर से मेहता ने माल्या के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण की जानकारी के बारे में विदेश मंत्रालय के अधिकारी देवेश उत्तम का पत्र पीठ को सौंपा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ब्रिटेन की सरकार के समक्ष माल्या के प्रत्यर्पण की चर्चा की है। भगोड़े शराब व्यापारी के प्रत्यर्पण के लिए केंद्र सरकार ने सभी प्रयास शुरू कर दी है।

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