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कर्नाटक में भाषा बन रही विवाद की वजह

कर्नाटक

भारत विविधताओं का देश है जहाँ हर राज्य या कहें हर क्षेत्र की अपनी अलग-अलग भाषाएँ हैं जिसका वह सम्मान करते हैं। कई बार भाषाओं की यही विविधता देश में एक विवाद का कारण बन जाती हैं। वर्तमान में कर्नाटक राज्य में भी भाषा को लेकर विवाद शुरू हो गया है। जहाँ  कर्नाटक रक्षणा वेदिके (केआरवी)  ने 27 दिसंबर को दुकानों, दफ्तरों व प्रतिष्ठानों आदि के बाहर लगे उन साइनबोर्ड और नेमप्लेट को तोड़ डाला जिनमें कन्नड़ भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

 

इस संगठन का कहना है कि. उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और वह किसी भी प्रकार के कारोबार के खिलाफ नहीं हैं ,लेकिन कर्नाटक में काम करने वाले हर उद्योगपति को कन्नड़ भाषा का सम्मान करना ही होगा। यहाँ व्यवसाय करने वाले व्यापारी अगर कन्नड़ भाषा को अनदेखा करते हैं या कन्नड़ अक्षरों का आकार छोटा रखते हैं तो वे यहाँ व्यवसाय नहीं कर सकते।

दरअसल कर्णाटक में 25 दिसंबर के दिन बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी )द्वारा एक आदेश जारी किया गया। जिसके तहत शहर की सभी दुकानों, होटल और मॉल आदि में लगे साइनबोर्ड पर 60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया था।जिसका हवाला देते हुए केआरवी संगठन ने यह प्रदर्शन किया।

 

क्या चाहते हैं विरोधी

 

60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा इस्तेमाल किये जाने के इस आदेश को लागू करने के बाद दुकानदारों को 28 फरवरी तक का समय दिया गया है। अगर समय सीमा तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो दुकानों का लाइसेंस रद्द भी किये जा सकता है। परन्तु बीबीएमपी द्वारा जारी किये गए इस आदेश के बाद ही केआरवी संगठन सहित कुछ अन्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि इस आदेश को तत्काल लागू किया जाए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे केआरवी संगठन के कुछ लोगों को हिरासत में भी ले लिया है।

 

यह पहली बार नहीं है की कर्णाटक में भाषा को लेकर ऐसा विरोध प्रदर्शन या कोई विवाद देखने को मिल रहा है इससे पहले भी कई बार कर्णाटक में भाषा को लेकर विवाद देखने को मिले हैं। इस साल मार्च के महीने में कर्णाटक का ही एक वीडियो वाइरल हुआ जिसमें एक ऑटो पर सवार महिला ऑटो चालक से कहती है कि वो हिंदी में बात करे। लेकिन ऑटो वाला इस बात से साफ़ मना कर देता और भड़क कर हिंदी भाषियों को ‘भिखारी’ तक कह देता है। जिसके बाद काफी बहस हुई और महिला को ऑटो से उतरना पड़ा। इसे देख कर यह पता चलता है कि कर्णाटक में लोग अपनी भाषा  लेकर कितने कट्टर  भाषा से कितनी नफरत करते हैं।

 

कर्नाटक में कम बोलते हैं हिंदी

 

भाषाई आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में सिर्फ 3.2 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो हिंदी बोलते हैं। कन्नड़ के बाद सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा उर्दू है, आखिरी जनगणना के आधार पर हुए विश्लेषण के मुताबिक राज्य में 10.8 फीसदी लोग उर्दू बोलते हैं, इसके बाद 5.8 प्रतिशत तेलगु, 3.5 प्रतिशत तमिल और 3.4 प्रतिशत मराठी भाषा हैं। कर्नाटक में हिंदी से कम सिर्फ तुलू, कोंकणी और मलयालम भाषा बोली जाती है।

 

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