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देश में जल, जंगल, जमीन और जनसंख्या : रिपोर्ट

देश में मौजूद जल, जंगल, जमीन, रोटी कपड़ा मकान और गरीबी बेरोजगारी भुखमरी आदि समस्याओं के पीछे जनसंख्या विस्फोट को कारण बताया गया है। टेम्पो बस और रेल में भीड़, थाना तहसील और जेल में भीड़ तथा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भीड़ का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है।
मौजूदा समय 124 करोड़ भारतीयों के पास आधार है। लगभग 20 प्रतिशत नागरिक (विशेष रूप से बच्चे) बिना आधार के हैं तथा 5 करोड़ बंगलादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिये अवैध रूप से भारत में रहते हैं। इससे स्पष्ट है कि हमारे देश की जनसंख्या 135 करोड़ नहीं बल्कि 150 करोड़ से ज़्यादा है और हम चीन से आगे निकल चुके हैं। यदि संसाधनों की बात करें तो हमारे पास कृषि योग्य भूमि दुनिया की लगभग 2% और पीने योग्य पानी 4% है लेकिन जनसंख्या 20% है।
यदि चीन से तुलना करें तो क्षेत्रफल चीन का लगभग एक तिहाई है लेकिन जनसंख्या वृद्धि की दर चीन की तीन गुना है। चीन में प्रति मिनट 11 बच्चे और भारत में प्रति मिनट 33 बच्चे पैदा होते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताते हुए छोटा परिवार रखने को देशभक्ति बताया तो अगले ही दिन शुक्रवार 16 अगस्त को पीएमओ में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर प्रजेंटेशन देने पहुंचे बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय। क्या आगे जनसंख्या पर रोकथाम लगाने वाला कानून आने वाला है?
बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने शुक्रवार की सुबह पीएमओ में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर प्रजेंटेशन दिया।
 उन्होंने इस कानून की जरूरत के पीछे कई तर्क दिए। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग (वेंकटचलैया आयोग) ने 2 वर्ष की मेहनत के बाद संविधान में आर्टिकल 47A जोड़ने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था जिसे आजतक लागू नहीं किया गया।
अब तक 125 बार संविधान संशोधन हो चुका है, कई बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बदला जा चुका है।
                                                                                                                                                                                                                                                   सैकड़ों नए कानून बनाये गए लेकिन देश के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया, जबकि “हम दो-हमारे दो”                कानून से देश की 50% समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
संबंधित आयोग में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वेंकटचलैया इसके अध्यक्ष तथा जस्टिस सरकारिया, जस्टिस जीवन रेड्डी और जस्टिस पुन्नैया इसके सदस्य थे। पूर्व अटॉर्नी जनरल केशव परासरन तथा सोली सोराब, लोकसभा के महासचिव सुभाष कश्यप, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष संगमा, सांसद सुमित्रा, वरिष्ठ पत्रकार सीआर ईरानी और अमेरिका में भारत के राजदूत रहे वरिष्ट नौकरशाह आबिद हुसैन भी इस आयोग के सदस्य थे। वेंकटचलैया आयोग ने 31 मार्च 2002 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी था।
 इसी आयोग के सुझाव पर मनरेगा, राईट टू एजुकेशन, राईट टू इनफार्मेशन और राईट टू फूड जैसे महत्वपूर्ण कानून बनाये गए लेकिन जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में चर्चा भी नहीं हुयी।
 चोरी डकैती झपटमारी घरेलू हिंसा तथा महिलाओं पर शारीरिक मानसिक अत्याचार ही नहीं बल्कि अलगाववाद कट्टरवाद और पत्थरबाजी का मूल कारण भी जनसंख्या विस्फोट है।
चोर डकैत झपटमार बलात्कारियों और भाड़े के हत्यारों पर सर्वे करने से पता चलता है कि 80% से अधिक अपराधी ऐसे हैं जिनके मां-बाप ने “हम दो-हमारे दो” नियम का पालन नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि भारत की 50% से अधिक समस्याओं का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है।

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