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…जब राजभर से दिल भर गया भाजपा का 

कहते है कि राजनीति और जंग में सब कुछ जायज है। आज इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने साबित भी कर दिया । सरकार में केबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा की नीतियों के विरोध में एक माह पूर्व ही इस्तीफा दे दिया था । लेकिन भाजपा के मुख्यमंत्री ने उनके इस्तीफे को स्वीकार नही किया । लेकिन जैसे ही 19 तारीख को एक्जिट पोल आए और उसमें राजभर की पार्टी का खाता भी नही खुलने की भनक लगी तो योगी ने पैतरा बदलने में देर नही लगाई । आज उनका इस्तीफा स्वीकार करने की बजाय मुख्यमंत्री योगी ने राज्यपाल को उन्हे बर्खास्त करने की अपील कर दी । राज्यपाल के अनुमोदन मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से सरकार ने ओमप्रकाश राजभर का अध्याय समाप्त कर दिया । यही नही बल्कि ओमप्रकाश की बर्खास्तगी से योगी ने राजभर संप्रदाय की संभावित नाराजगी के डर के मद्देनजर सरकार में ही राज्यमंत्री अनिल राजभर को प्रमोशन कर केबिनेट मंत्री बनाकर डेमेज कंट्रोल करने की भी कसरत कर दी है । सरकार ने यह सब राजभर समाज को साधने के लिए किया । उधर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष  ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि उन्होंने 13 अप्रैल को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था। अब बर्खास्त किया जाए, या कुछ और हो, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
इसी के साथ ही योगी सरकार ने राज्यमंत्री अनिल राजभर को ओमप्रकाश के मंत्रालय का प्रभार सौपने के अलावा पांच निगमों में पार्टी के सात अध्यक्ष और सदस्यों को पदमुक्त भी कर दिया है । इनमें ओमप्रकाश के बेटे अरविंद राजभर को सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के चेयरमैन पद से हटाया गया। इसी तरह उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के अध्यक्ष राणा अजीत सिंह, राष्ट्रीय एकीकरण परिषद से सुनील अर्कवंशी और राधिका पटेल, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के सदस्य पद से सुदामा राजभर, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग से गंगाराम राजभर और वीरेंद्र राजभर को भी हटाया गया।
गौरतलब है कि आरक्षण के वर्गीकरण की मांग को लेकर पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण मंत्री राजभर अक्सर भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ योगी के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए थे। चुनाव से पहले उन्होंने आरक्षण के वर्गीकरण को लागू करने की मांग रखी थी। मांग पूरी न होने पर उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उनका इस्तीफा तब स्वीकार नहीं हुआ था।
योगी और भाजपा सरकार के खिलाफ बयानबाजी के बाद राजभर ने अपनी पार्टी सुभासपा के टिकट परपूर्वांचल की 39 सीटों पर उम्मीदवार भी उतार दिए थे। पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद राजभर ने एनडीए में रहने के बावजूद विपक्षी दलों को समर्थन देने का ऐलान किया था।
राजनीति के जानकारों की मानें तो इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तगड़ा झटका लगने वाला है। ऐसे में पूर्वांचल की लोकसभा सीटें बीजेपी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जा रही थी । पिछली बार बीजेपी पूर्वांचल में 30 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। लेकिन इस चुनाव में ओमप्रकाश राजभार बीजेपी के उम्मीदों पर पानी फेरते नजर आए।
ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पूर्वांचल में काफी असर रखती है। राजभर ने बीजेपी से बगावत कर दी थी । ओमप्रकाश राजभर और उनकी पार्टी के नेता योगी सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं। इतना ही नहीं ओमप्रकाश राजभर ने ऐलान किया था कि पूर्वांचल में 30 सीट जीतने वाली बीजीपी अब अगर 3 सीटें जीत जाएं तो वो राजनीति छोड़ देंगे।
ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि वाराणसी को छोड़कर हर जगह बीजेपी की हालात खस्ता है। ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि अखिलेश यादव और मायावती का महागठबंधन यूपी में जीत रहा है हम अब किसी भी गठबंधन के साथ नहीं जाएंगे।
इस्तीफा देने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि बीजेपी मेरी फोटो लगा कर वोट मांग रही है। ऐसे में राजभर वोटर बीजेपी से सावधन रहे।
बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी चुनाव 2017 से पहले सुभासपा से गठबंधन किया था इसके बाद यूपी चुनाव परिणाम आने के बाद ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था लेकिन यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से राजभार और बीजेपी के रिश्ते बिगड़ते गये थे, जो इस्तीफा देने के साथ खत्म भी हो गए। राजभर  लगातार सूबे में अफसरों की मनमानी के खिलाफ बोलते रहे हैं साथ ही वो इसी सरकार में मंत्री रहते हुए डीएम के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। इस बार उन्होंने 39 उम्मीदवार खड़े किए है जिसमें से राजभर जाति के 13 मजबूत उम्मीदवार बीजेपी के लिए सरदर्द बन गए हैं।
पूर्वांचल में राजभर वोट बैंक की एकजुटता इनकी ताकत है। यहा 26 सीटों पर 50 हजार से सवा दो लाख तक राजभर जाति की वोट हैं।13 लोकसभा सीट पर तो राजभर एक लाख से भी अधिक है ।
याद रहे कि 2014 में इन्ही ओमप्रकाश राजभर ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री  बनाने के लिए एकता मंच का गठन किया था। लेकिन पाच साल बाद आज वह उन्हें हराना चाहते है ।
उल्लेखनीय है कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजभर की पार्टी को 7 विधानसभा सीटें दी गई थीं। जिसमें से 4 पर उनकी पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि वह सरकार में रहने के बावजूद योगी सरकार की आलोचना करते रहे हैं।

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