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.तो क्या बदलेगा यूपी का राजनीतिक परिदृश्य 

गत दिनों मैनपुरी में प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया। शिवपाल ने पत्रकारों के समक्ष जो कहा उसके निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। कयास लगाए जाने लगे हैं कि यदि मुलायम सिंह यादव का प्रयास रंग लाया तो निश्चित तौर पर यूपी का परिदृश्य भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।
सपा से बाहर होकर प्रगतिशील समाज पार्टी का गठन करने वाले शिवपाल यादव लोकसभा चुनाव परिणाम को लेकर बेहद खुश हैं। उनकी यह खुशी भाजपा की जीत को लेकर कम सपा की हार को लेकर अधिक है। वे इसलिए भी खुश हैं कि उनकी कही बात सच साबित हुई। बताते चलें कि लोकसभा चुनाव से पूर्व बसपा के साथ गठबन्धन की प्रक्रिया शुरु होने से पूर्व ही शिवपाल यादव ने स्पष्ट कह दिया था कि यह गठबन्धन सपा के आत्मघाती सिद्ध होगा और हुआ भी कुछ ऐसा ही। सपा के सहारे मृत्यु शैया पर लेटी बसपा 10 सीटों के साथ यूपी में दूसरे नम्बर की पार्टी बन गयी जबकि सपा तीसरे नम्बर पर पहुंच गयी। शिवपाल यादव इसलिए भी बेहद प्रसन्न हैं कि शायद अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अक्ल आ जाए। हाल ही में जब पूर्व सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को मुलायम रणनीति अपनाने की सलाह दी और अखिलेश बिना न नुकुर किए उस सलाह को मान लिया तो सर्वाधिक खुशी शिवपाल यादव में देखी गयी। ऐसा इसलिए कि लोकसभा चुनाव में सपा की पराजय के बाद से जिस तरह की गतिविधियां हाल के दिनों में घटित हुई हैं उससे शिवपाल यादव को अपना राजनीतिक भविष्य एक बार फिर से ढर्रे पर नजर आता दिख रहा है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल यादव को पुनः सपा में शामिल होकर पार्टी को मजबूती प्रदान करने का आॅफर दिया है, बदले में उन्हें पार्टी में सम्मानजनक पद दिए जाने की बात भी कही जा रही है। हालांकि अभी शिवपाल यादव ने सपा में लौटने से साफ इंकार कर दिया है लेकिन कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की दुर्गति देखने के बाद प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव पुनः सपा में लौटेंगे अवश्य, बस इंतजार है अखिलेश यादव की तरफ से सम्मानजनक बुलावे का। दोनों के बीच समझौते के लिए मुलायम सिंह यादव दबाव बना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक और राजनीति पर अपनी कलम चलाने वाले वरिष्ठ पत्रकारों का भी यही मानना है कि देर-सबेर शिवपाल यादव पुनः सपा में शामिल होकर न सिर्फ अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने में कामयाब होंगे अपितु सपा को भी पुनर्जीवित करेंगे। सपा के कई बड़े नेता भी यही मानते हैं कि अखिलेश में राजनीति का वह अनुभव नहीं है जो मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव में है। वैसे भी सपा को खड़ा करने में शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव की मुख्य भूमिका रही है। सही मायने में इन दोनों नेताओं ने पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा है।
लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से मात खाने के बावजूद कल मैनपुरी में प्रेस वार्ता के दौरान शिवपाल यादव के चेहरे पर खुशी स्पष्ट झलक रही थी। शिवपाल यादव ने बिना झिझके कहा, ‘सपा अपने कर्मों से हारी है, सपा के कर्म ठीक होेते तो वह चुनाव नहीं हारती। सपा किसकी वजह से चुनाव हारी है? सभी जानते हैं।’ हालांकि शिवपाल यादव ने बसपा प्रमुख मायावती का नाम नहीं लिया फिर भी पत्रकारों ने चुटकी ले ही ली लेकिन राजनीति के दिग्गज पहलवान शिवपाल यादव ने जवाब देने के बजाए हल्का सा मुस्करा भर दिया। इतना ही काफी था पत्रकारों के ज्ञान वर्धन के लिए कि शिवपाल यादव का इशारा किसकी तरफ है।
मुलायम सिंह यादव के प्रति उनका लगाव प्रेस वार्ता के दौरान भी नजर आया। शिवपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव को पूरी तरह से स्वस्थ बताते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद उनके साथ बना हुआ है। मुलायम के प्रति विश्वास जताने के पीछे का मर्म पत्रकार आसानी से भांप गए। बताना जरूरी है कि मुलायम सिंह यादव अपने बेटे और वर्तमान सपा प्रमुख अखिलेश यादव का साथ कभी नहीं छोडे़ंगे। ऐसी स्थिति में शिवपाल को मुलायम का आशीर्वाद कैसे प्राप्त होगा? इसका अंदाजा पत्रकार बंधुओं ने तो लगा लिया है, बस इंतजार है उस दिन का जिस दिन मुलायम की अगुवाई में शिवपाल के घर वापसी की घोषणा होगी। अन्दरखाने से मिली जानकारी के अनुसार लोकसभा चुनाव में सपा का हश्र देखकर कई सपा नेताओं ने मुलायम सिंह यादव से शिवपाल की घर वापसी को लेकर चर्चा की है। दूसरी ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी हठ छोड़कर शिवपाल को स्वीकारने का मन बना चुके हैं। अब शायद उन्हें भी यह लगने लगा है कि शिवपाल जैसे बडे़ नेताओं की अनदेखी उन्हें भविष्य में भी महंगी पड़ सकती है।
शिवपाल यादव ने भी इशारा कर दिया है कि उनकी पार्टी का सपा के साथ गठबन्धन होगा या नहीं इसका फैसला पार्टी के बोर्ड को करना है जबकि सभी जानते हैं कि पार्टी की बोर्ड तो महज एक बहाना मात्र है जबकि हकीकत यह है कि प्रसपा में शिवपाल यादव जो चाहेंगे, वही होगा। कहा तो यहां तक जा रहा है कि अब प्रसपा नेता भी सपा में मिलकर राजनीति करना चाहते हैं। दोनों ही दलों को यह लगने लगा है कि यदि जल्द इस फैसला नहीं हुआ और दोनों अडे़ रहे तो नुकसान दोनों ही दलों का है। शिवपाल यादव ने संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव (वर्ष 2022) तैयारियों को लेकर फैसला शीघ्र किया जायेगा, फिलहाल तो विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर संगठन को मजबूत किया जायेगा।
अपनी पूरी बयानबाजी के दौरान शिवपाल यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खूबी का बखान करना अचंभे में डालने जैसा है। शिवपाल यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मेहनती और इमानदार बताया। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ भले ही इमानदारी से काम करने की चेष्टा कर रहे हों लेकिन उनके राज में नौकरशाही पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूब चुकी है और उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है।
फिलहाल मैनपुरी में पत्रकार वार्ता के दौरान शिवपाल यादव के यह बोल यूपी की राजनीति में ही जल्द ही हलचल पैदा कर सकते हैं। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही शिवपाल यादव एक बार फिर से सम्मानजनक तरीके से सपा में नजर आयेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यदि ऐसा हो गया तो आगामी विधानसभा चुनाव में सपा की दावेदारी से इंकार नहीं किया जा सकता।

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