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कुढे के ढेर पर योग बढा रहा रोग 

स्वच्छ मिशन भारत की चकाचौंध पूर्ण तस्वीर दिखाने के लिए देश के नेता हाथों में झाडू लेकर फोटो खिचवाते मिल जाते है। कुछ तो सफाई युक्त सडको पर पहले गंदगी गिराते है और बाद में उसकी सफाई करते मीडिया में फोटो छपवाते है।  इसी तरह योग दिवस की औपचारिकताए पूर्ण कर ली जाती है। साल में एक दिन किसी साफ सुथरे पार्क में बैठकर दो चार बार सास बाहर – भीतर की जाती है और देश में “योग भगाए रोग” का प्रचार कर दिया जाता है। इस प्रचार को मीडिया खासकर सोशल मीडिया पर इतना वायरल किया जाता है कि आज के दिन लगने लगता है कि देश के सभी लोगों में बीमारियों से निजात दिलाने का समय चल रहा है।
लेकिन देश की राजधानी दिल्ली से 250 किलोमीटर दूर एक ऐसा शहर भी है जहा के हजारों लोगों के लिए स्वच्छ मिशन भारत और अंतरराष्टीय योग दिवस बेमानी लगते है।  जी हाँ हम बात कर रहे है उत्तराखंड के विकसित होते शहर हल्द्वानी की।  जहा के वनभूलपुरा के वाशिंदो के लिए योग दिवस जैसे एक मजाक बनकर उन लोगों को चिढाता नजर आता है। पिछले कयी साल से यहा के लोग शहर की गंदगी से अटे पडे उस मलबे को आबादी से दूर शिफ्ट करने की लडाई लड रहे है। हाईकोर्ट तक ने आबादी के पास स्थित टंचिंग ग्रांउड को स्थानांतरित करने के आदेश भी दे दिए हैं । लेकिन यहा के लोगों की किस्मत में साफ – सफाई और शुद्ध हवा नसीब नही हो पा रही है। फिलहाल इन्होने अपने विरोध प्रदर्शन का अजीबो गरीब तरीका निकाला है। आज के दिन जब पूरे देश में योग दिवस मनाया जा रहा है तो इन्होने योग कुढे के ढेर के बीच कर अपनी इस समस्या के प्रति देश और दुनिया का ध्यान आकर्षित करने का काम किया है।
योग दिवस के मौके पर आज वनभूलपुरा के लोगों ने 90 लाख टन कूड़े के ढेर के बीच मुँह पर मास्क लगाकर योग किया। साथ ही लोगों ने स्थानीय प्रशासन से ये अपील की कि आबादी से सटे इस अवैध टचिंग ग्राउंड को यहां से शिफ्ट किया जाए।
प्रभावित लोगों का कहना है कि कूड़े के बीच कई तरह का योगासन किये । लेकिन कोई भी ऐसा योगा नहीं मिला, जिससे जहरीली हवा उनके शरीर में प्रवेश ना कर सके।
उनके मुताबिक करीब चार से पांच साल पहले टचिंग ग्राउंड की जगह अच्छा खासा खेल का मैदान था जो अब कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका है।
लोगों का कहना है कि कूड़े के ढेर पर योग कर प्रशासन को यह पैगाम देने की कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द स्थानीय टचिंग ग्राउंड को दूसरी जगह शिफ्ट करें, जिससे अगले साल योग दिवस के दिन लोग इसी जगह पर स्वस्थ वातावरण में योगा कर सके।
सामाजिक कार्यकर्ता सरताज आलम ने बताया कि क्षेत्र के नागरिक लम्बे समय से इस ट्रंचिग ग्राउंड का विरोध कर रहे हैं । नगर निगम और राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं । पिछले 9 महीने में कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट उपयुक्त स्थान पर बनाने का आदेश  10 और 18 जुलाई 2018 को किया गया । हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अबादी और नदी के पास कूड़े से प्रदूषण न किया जाए । इसके बावजूद निगम और सरकार तानाशाही कर नागरिकों की जान से खेल रहे हैं । दिन रात कूड़ा जलाया जाता है और नागरिकों को बीमार कर मारा जा रहा है।
वहीँ इंदिरा नगर जनविकास समिति के सचिव तसलीम अंसारी ने कहा कि लम्बे समय से चलाए जा रहे इस आंदोलन,नियमो और हाईकोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर सिस्टम घनी अबादी के स्वास्थ से खिलवाड़ कर रहा है ।हमारी मांग है कि इस कूड़े को अन्यंत्र अबादी और गोला नदी से दूर शिफ्ट किया जाए । हाईकोर्ट के आदेशों के क्रम में उपयुक्त स्थान पर कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाए और लोगो को स्वच्छ साँस लेने के अधिकार से वंचित न किया जाए।
बताते चले कि हरे भरे जंगल और मैदान को निगम और सरकार ने लाखों टन कूड़े से पाट दिया है कुछ सालों पहले तक उक्त स्थान पर  स्थानीय खेल हुआ करते थे और लोग योगाभ्यास किया करते थे । लेकिन आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर उस 15 हेक्टेयर क्षेत्र में लाखों टन कूड़ा है जिस पर बैठकर नागरिक योग करने के लिए मजबूर है।

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