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Koo ऐप का चीनी कनेक्शन

किसानों के आंदोलन के दौरान कंटेंट सेंसरशिप को लेकर केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच विवाद के बाद से ‘मेड इन इंडिया’ कू ऐप लोकप्रियता हासिल कर रहा है। ट्विटर पर स्वदेशी विकल्प के रूप में कू ऐप की चर्चा हो रही है और सरकार के कुछ मंत्री भी कू ऐप के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हालाँकि, यह पता चला है कि इस ‘मेड इन इंडिया’ ऐप में चीनी निवेश है।

न्यूज़ चैनल CNBC-TV18 के साथ हाल ही में एक साक्षात्कार में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा,“शुनवेई कैपिटल, एक चीनी कंपनी है, जिसका कू ऐप में एक छोटा सा निवेश है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी खरीदी जा सकती है। इसलिए, वे जल्द ही इससे बाहर निकल जाएंगे।” शुनवेई कैपिटल के अलावा, कू के पास 3one4 कैपिटल (पूर्व इंफोसिस बोर्ड के सदस्य मोहनदास पई की कंपनी), कलारी कैपिटल और ब्लम वेंचर्स में निवेश है।

‘Koo’ से जानकारी लीक की खबर

‘कू’ ऐप को लेकर फ्रेंच सिक्योरिटी रिसर्चर रॉबर्ट बैपटिस्ट ने दावा किया कि ‘Koo’ का प्रयोग सुरक्षित नहीं है। क्योंकि इस ऐप के जरिए यूजर्स की ई-मेल आईडी, फोन नंबर और डेट ऑफ बर्थ (जन्मतिथि) जैसी जानकारी लीक की जा रही है। बता दें कि रॉबर्ट बैपटिस्ट ट्वीटर हैंडल पर एलियट एंडरसन के नाम से जाने जाते हैं। रोबर्ट के दावे के बाद ‘Koo’ ऐप के फाउंडर अप्रमेय राधाकृष्णा ने सफाई दी है कि डेटा लीक की खबर गैरजरूरी हैं।

‘Koo’ ऐप क्या है?

‘कू’ ऐप को मार्च 2020 में अप्रमेय  राधाकृष्ण और मयंक बिदावतका द्वारा विकसित किया गया था। ‘कू’ ऐप ने अगस्त 2020 में भारत सरकार द्वारा आयोजित आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज जीता था । मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी ‘कू’ का उल्लेख किया गया था। ‘कू’ ऐप ट्विटर जैसी भारतीय भाषाओं में माइक्रोब्लॉगिंग का अनुभव प्रदान करता है। सीधे शब्दों में कहें तो कू का मतलब है ‘मेड इन इंडिया’ ट्विटर। ऐप हिंदी, अंग्रेजी, मराठी सहित आठ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है । ‘कू’ का उपयोग वेबसाइट के साथ-साथ ऐप पर भी किया जा सकता है। यह 350 के शब्द सीमा के साथ ट्विटर के समान इंटरफ़ेस है। ट्विटर की तरह, ‘कू’ के पास उपयोगकर्ताओं को फॉलो करने का विकल्प है। ‘कू’ पर भारतीय भाषाओं में विचार व्यक्त करने की सुविधा है।

ट्विटर-केंद्र सरकार का विवाद क्या है?

हाल ही में ट्विटर ने कुछ ट्वीट्स और खातों पर प्रतिबंध लगाने के सरकारी आदेशों का पालन करने से इंकार कर दिया जो किसान आंदोलन के दौरान झूठी और उत्तेजक जानकारी फैला रहे थे। इस पर सरकार और ट्विटर के बीच बहस अब भी जारी है। दरअसल ट्विटर द्वारा सरकार के आदेश पर कई अकाउंट भारत में प्रतिबंधित भी किए थे लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उन्हें कुछ ही घंटों में फिर से चालू कर दिया गया था। अब फिर से ऐसे अकाउंट को प्रतिबंधित किया जा रहा है। लेकिन इस दौरान मेड इन इंडिया ‘कू’ ऐप को इससे काफी फायदा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में कू डाउनलोडर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।

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