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कलकत्ता हाईकोर्ट ने आईपीएस राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर की सुनवाई

कोलकाता: शारदा चिटफंड घोटाले से जुड़े को सबूतों को मिटाने एवं छेड़छाड़ के आरोपों में घिरे कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने बुधवार 25 सितम्बर को बंद कमरे में सुनवाई की। राजीव कुमार के वकील ने बंद कमरे में सुनवाई के लिए अपील की थी, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया था।

हाईकोर्ट के जस्टिस एस. मुंशी और जस्टिस एस. दासगुप्ता की खंडपीठ ने राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर उनके वकीलों की दलीलें सुनीं। इस दौरान केवल वही अधिवक्ता कोर्ट में मौजूद थे, जो मामले से जुड़े हैं। बता दे कि हाईकोर्ट की डिविजन बेंच गुरुवार को एक बार फिर मामले में सुनवाई करेगी। यह अग्रिम जमानत याचिका राजीव कुमार की पत्‍नी ने दायर की थी।

दरअसल अलीपुर जिला व सत्र अदालत ने 21 सितंबर को राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सीबीआई ने अदालत से कहा कि हजारों करोड़ रुपये के शारदा चिटफंड घोटाला मामले में आईपीएस अफसर राजीव कुमार को कई बार नोटिस भेजा गया, लेकिन वह पेश नहीं हुए। ऐसा करके वह कानून तोड़ रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी थी। इसके बाद उनकी पत्‍नी ने उन्‍हें गिरफ्तारी से बचाने के लिए कलकत्‍ता हाईकोर्ट में 23 सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका दायर की।

क्या है शारदा चिटफंड घोटाला 

शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटाले के तौर पर जाना जाता है। दरअसल इस कंपनी पर आरोप लगाए गए हैं कि पैसे ठगने के लिए लोगों से लुभावने वादे किए गए थे और पैसे को 34 गुना करके वापस करने के लिए कहा गया था। साल 2013 में सामने आए इस मामले में शारदा कंपनी ने लोगों से 34 गुना फायदा के नाम पर निवेश कराया और पैसा नहीं दे पाए। वहीं निवेशकों ने जब एजेंटो से पैसा मांगा तो कई एंजेटों ने जान दे दी। ये मामला ना केवल बंगाल बल्कि असम, ओडिशा तक पहुंच गया था क्योंकि इन कंपनियों ने यहां भी चिट फंड के नाम पर लोगों को ठगा था। यह घोटाला इतना बड़ा था कि इसमें 40 हजार करोड़ की हेरा-फेरी की गई थी। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए सीबीआई से कहा था कि वो इस मामले की जांच करे। साथ ही कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस से कहा था कि वो भी जांच में सहयोग दें। शारदा समूह की कंपनियों ने लाखों लोगों के साथ कथित तौर पर 2500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी।

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