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जानें, निजामुद्दीन के आलमी मरकज में चले 36 घण्टे सघन अभियान में क्या-क्या हुआ?

 

निजामुद्दीन की मरकज बिल्डिंग कोरोनावायरस का केंद्र बन गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां से 1 अप्रैल की सुबह तक सभी 2000 से ज्यादा जमातियों को बाहर निकाल लिया गया है। यहां से निकले लोगों की तलाश में 20 से ज्यादा राज्यों में अभियान छेड़ा गया है। इनमें से कई लोगों को ट्रेस कर लिया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि मरकज से गए 120 लोग कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। इनमें से 77 अकेले तमिलनाडु में हैं।

9 मरीज अंडमान-निकोबार, 4 आंध्र प्रदेश और दिल्ली में अभी तक 24 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। उधर, तेलंगाना में 6 मरीज मिले थे।आशंका जताई जा रही है कि ये मामले और बढ़ सकते हैं।दिल्ली सरकार 31 मार्च की शाम तक मरकज से 1,548 लोगों को निकाल चुकी थी। कोरोना के लक्षण वाले 500 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी क्वारैंटाइन में हैं। 441 लोगों में से 417 को बिना जांच करवाए कोरोना पेशेंट मानकर इलाज शुरू हो गया है। सरकार की चिंता इसलिए बढ़ी हुई है कि मरकज से गए दो हजार से अधिक विदेशी जमाती देशभर में इधर-उधर घूम रहे हैं।

1 अप्रैल को करीब 11 बजे दिल्ली में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीटर पर यह जानकारी दी कि,”निज़ामुद्दीन के आलमी मरकज़ में 36 घंटे का सघन अभियान चलाकर सुबह चार बजे पूरी बिल्डिंग को ख़ाली करा लिया गया है। इस इमारत में कुल 2361 लोग निकले। इसमें से 617 को अस्पताल में और बाक़ी को क्वारंटीन में भर्ती कराया गया है।” उन्होंने इस अभियान में लगे सभी कर्मचारियों का हौसला अफ़जाई करते हुए आगे लिखा कि,

“क़रीब 36 घंटे के इस ओपरेशन में मेडिकल स्टाफ़, प्रशासन, पुलिस, डीटीसी स्टाफ़ सबने मिलकर, अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। इन सबको दिल से सलाम।”

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मरकज से गए संक्रमितों के संपर्क में 20 राज्यों के 16 शहरों में कम से कम 10 हजार लोग आए हैं। राज्यों को भी इन लोगों की सूची भेज दी गई है। मरकज में संक्रमण का खुलासा होने के बाद केंद्र ने देशभर के 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कोरोना के 16 हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन्हें ढूंढकर तुरंत देश से बाहर निकालने का आदेश दिया है।

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