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दिल्ली से मसूरी तक काया परिवार की माया, 1100 लोगों को दो माह से खिला रहे खाना

दिल्ली से मसूरी तक काया परिवार की माया,1100 लोगों को दो माह से खिला रहे खाना

सरकार ने कोरोना योद्धा की संज्ञा स्वास्थकर्मियो और पुलिसकर्मियों को दी है । लेकिन सबसे बड़ा कोरोना योद्धा वह है जो भूखे लोगों को खाना खिला रहा है। कहा भी जाता है कि दुनिया में सबसे बड़ा दान अन्न दान होता है। ऐसे ही अन्नदाता बने हैं काया परिवार। जी ,हां वही काया परिवार जो अपने पुण्य कर्मों के चलते चर्चा में रहते हैं। कभी वह कानपुर में लंगर लगाते हैं तो कभी मथुरा में गोवर्धन परिक्रमा में गए भक्तों के लिए भंडारा चलाते हैं। अब इस काया परिवार ने कोरोना काल में नई मिसाल कायम की है।

दिल्ली से लेकर देहरादून तक काया परिवार की माया की सराहना हो रही है।  यह परिवार 1100 लोगों को खाना खिलवा रहे हैं। वह 1100 लोग जो बेघर है और बेसहारा है। जिनका कोई आसरा नहीं है। ऐसे में उनके लिए  काया परिवार सहारा बन कर सामने आया हैं। याद रहे कि यह वही काया परिवार है जिनका उत्तराखंड के मसूरी में माल रोड पर सवाय हेरिटेज होटल है।

कहा जाता है कि इंसान की पहचान तब होती है जब इंसानियत खतरे में होती है। इंसानों पर जब दुखों के पहाड़ टूटते हैं, तो ऐसे में कुछ इंसान भगवान का रूप धारण करके उन दुखों के पहाड़ को इंसानो पर बोझ नही बनने देंते हैं। ठीक उसी तरह जैसे द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने का संकल्प लिया था।  भगवान कृष्ण ने लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली से उठा लिया था और उस पर्वत के नीचे पूरे ब्रजवासी आश्रय पा गए थे । इसी तरह मारवाड़ी काया परिवार ने जरूरतमंद लोगों के लिए अपने भंडार खोल दिए हैं।

रोज सुबह से ही काया परिवार के मुखिया किशोर काया और उनकी पत्नी मधु काया पूडी बनाने और बेलने में लग जाते हैं । किशोर काया कढ़ाई पर बैठकर पूडी तलते हैं तो उनकी अर्धांगिनी मधू काया आटा बेलती रहती है। मधू काया ने एक-एक दिन में अस्सी-अस्सी किलो आटा तक बेलकर पूडी बनाई है । आटे की लोई बना कर वह अपने पति किशोर काया को देती रहती हैं।

किशोर काया उनको तेल की कढ़ाई में डालकर तलते हैं और पूडी बनाते हैं। इसके साथ ही उनकी बेटी जाह्नवी काया खाना बन जाने के बाद उसके पैकेट बनाने में मशगूल हो जाती है। यही नहीं बल्कि इस परिवार की एक नन्हीं जान सनाया गुप्ता  भी नन्हे-नन्हे कदमों से खाने के पैकेटों को गाड़ी में रखा कर खुशी से उछलती रहती है । यह नन्ही जान सनाया गुप्ता किशोर काया की नातिन है।

इसके बाद किशोर काया के पुत्र सक्षम काया खाने के पैकेटों को गाड़ियों में भरकर जरूरतमंदों तक पहुंचाते है। दिल्ली में मोरी गेट से लेकर कश्मीरी गेट तक के बीच में शाम 6 बजे से ही जरूरतमंद लोगों की लाइन लग जाती है। सड़क के दोनों तरफ लंबी-लंबी लाइन उन लोगों की लगी रहती है जो दूरदराज के हैं और घरों से दूर हैं।

वह लोग जो लॉकडाउन में घरों से दूर रहने को मजबूर है । यह लोग जिनके पास ना खाने को दाना है ना पीने को पानी उनके लिए शाम को 7 बजे काया परिवार गाड़ियों में भरकर खाना लाता है और उन्हें खाना खिलाया जाता हैं । इस तरह रोजाना 1000 लोगों को खाना खिलवाया जाता है।

 

 

यह तो था दिल्ली का दृश्य । अब आपको ले चलते हैं दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर पहाड़ों की रानी मसूरी में। वहा भी काया परिवार 100 लोगों को रोजाना खाना खिला रहा है। यह वह लोग हैं जो काया परिवार के 200 साल पुराने हेरिटेज सवाए होटल में मजदूरी करते थे। वहा निर्माण कार्य में लगे रहते थे। ये लोग राजमिस्त्री थे और कुछ उनके हेल्पर थे । यह मजदूर वर्ग लॉकडाउन के चलते मसूरी में ही फंस गए। उसके बाद काया परिवार ने इन सभी 100 लोगों को खाना खिलाने और उनका पालन पोषण करने का बीड़ा उठाया।

काया परिवार ने सभी को अपने होटल में ही रखा। होटल में ही उनके लिए तीन वक्त का खाना बनता और खिलाया जाता है। इसी के साथ ही उन सभी को योगा की क्लास कराई जाती है, तथा पढ़ने को अखबार दिया जाता है। इसके अलावा काया परिवार का एक और महत्वपूर्ण कार्य है जिसकी लोग काफी सराहना कर रहे हैं। वह है मॉस्क बनाना।

काया परिवार ने काफी लोगों के लिए मॉस्क बनवाएं और बटवाए। क्योंकि उस समय बाजार बंद हो चुके थे और मॉस्क बनाने के लिए कपड़ा नहीं मिल रहा था। तो ऐसे में काया परिवार ने अपनी बेडशीट से ही मॉस्क बनाने शुरू कर दिए । बेडशीट को काट-काट कर हजारों मॉस्क सिलवाए गए और उनको फिर लोगों में बटवाया गया। इसके लिए बकायदा मसूरी के थाना प्रभारी ने उनकी तारीफ की है। मसूरी के थाना प्रभारी ही नहीं बल्कि कई राजनेताओं में काया परिवार के इस पुण्य कार्य की सराहना की है।

काया परिवार ने दिल्ली में 1000 लोगों का 2 महीने का खाने का इंतजाम किया है। इसी के साथ ही उन्हें पीने का पानी भी दिया जाता है । यह शायद पहली बार होगा कि जब खाने के साथ कोई दानदाता मिठाई भी खिलाता है ।

काया परिवार के मुखिया किशोर काया के अनुसार 2 महीने पहले दिल्ली में जब उन्होंने खाना आवंटन करने की शुरुआत की थी तब 500 से 700 व्यक्तियों के लिए खाना बनाया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे धीरे यह संख्या बढ़ने लगी और यह 1000 तक पहुंच गए।

किशोर काया बताते हैं कि कभी-कभी 1000 से भी ज्यादा लोग खाने वाले हो जाते हैं तो उनके लिए एक्स्ट्रा पैकेट बनवाए जाते हैं। इसी के साथ ही काया परिवार ने अपना घर जरूरतमंदों के लिए खोल दिया है। कोई भी व्यक्ति कभी भी काया परिवार के दरबार में दस्तक दे सकता है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो घर जाकर भी खाना ले आते हैं। काया परिवार ने ऐसे लोगों के लिए खाने के साथ-साथ कच्चा राशन भी बनाया हुआ है। यह कच्चा राशन पैकेट में दिया जाता है और 8 से 10 दिन तक चल जाता है।

किशोर काया की पत्नी मधु काया कहती है कि कुछ दिनों पूर्व जब लॉकडाउन-3 खत्म हुआ तो उन्होंने खाना बंद करने की ठानी। लेकिन कुछ लोग आ गए और उन्होंने कहा कि वह खाना आपसे ही लेंगे। क्योंकि आपका खाना स्वादिष्ट होने के साथ-साथ ही पोष्टवर्धक भी है। इसके बाद लोगों की जरूरत के हिसाब से उन्होंने लॉकडाउन रहने तक खाना बांटने का संकल्प ले लिया है।

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