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कांवड़ यात्रा पर वोट राजनीति

उन्नतीस जुलाई को शुरू हुई कांवड़ यात्रा 9 अगस्त को खत्म हो गई। इस बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्था की थी। इस विशेष व्यवस्था में कांवड़ यात्रियों का फूलों से स्वागत करना भी था। यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाया गया और कांवड़िये सड़क पर डंडा भांजते रहे। पुलिस सिर्फ मूक दर्शक बनी रही। राजनीतिक दल कांवड़ यात्रा पर भी वोट की राजनीति करने लगे।
हेलीकॉप्टर से मेरठ रेंज के एडीजी प्रशांत कुमार ने सात अगस्त को तो डीएम और एसएसपी ने छह अगस्त को फूल बरसाए। एडीजी ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार के कहने पर ऐसा किया गया। इसे धार्मिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। लोगों के स्वागत के लिए फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन सभी धर्मों का सम्मान करता है।
यूपी के कई जिलों में अधिकारी कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर रहे हैं। योगी सरकार की इस व्यवस्था से कांवड़िएं काफी खुश हैं और नारा लगा रहे हैं, ‘योगी तेरे राज में, मिल रहा सम्मान जहाज में।’ दूसरी ओर कांवडियों पर पुष्प वर्षा को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहे हैं। वे इसे सरकारी संसाधनों का दुरूपयोग बता रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 जुलाई को हेलीकॉप्टर से कांवड़ यात्रा मार्ग का हवाई सर्वेक्षण किया था। उस वक्त उन्होंने भी कांवड़ यात्रियों पर फूल बरसाए थे। योगी के हवाई सर्वेक्षण के दौरान हाईवे से गुजर रहे कांवड़ियों ने कई नारे भी लगाए।
मसलन, ‘डीजे बजवा दिया योगी ने, भोले नचवा दिया योगी ने’, अखिलेश राज में कांवड़ियों के डीजे पर रोक लगा दिया गया था। कांवड़ियों ने उसके विरोध यह नारा दिया कि ‘अखिलेश ने हुकुम सुनाया था, डीजे पर बैन लगाया था, 2017 के चुनाव में भोले ने उसे हराया था, छक्के छुड़ाया योगी ने।’
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीजे पर रोक लगाया था। जिस पर कांवड़िये गुस्से में हो गए। 18 जुलाई सन् 2005 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आरसी लोहाटी और न्यायमूर्ति अशोक भान की पीठ ने रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक तेज आवाज करने वाले डीजे, लाउडस्पीकर वगैरह पर प्रतिबंध लगा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने लाउडस्पीकर लगाने के लिए चार जोन विभाजित किए गए हैं। कोर्ट ने इंडस्ट्रीयल, कामर्शियल, रेजिडेंट और साइलेंट जोन में साउंड के अलग-अलग मानक तय किए हैं। इंडस्ट्रीयल एरिया में 75 डेसीबल, कामर्शियल 70, रेजिडेंसियल 65 और साइलेंस जोन में किसी तरह की कोई अनुमति नहीं है। कावंड़ यात्रा मार्ग पर साइलेंस जोन भी है। इसके बावजूद कांवड़ियों का डीजे फूल वोल्यूम में बजाते रहे है। आवासीय क्षेत्र में रात्रि 10 से सुबह 6 बजे तक कोई भी लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं कर सकता।
यदि कोई सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करता है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 188,290 इनवॉयरन्मेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कार्रवाई की जा सकती। पर यहां कार्रवाई करने वाले भी रूल्स तोड़ने वालो के साथ खड़े हो गए।
कांवड़ियों ने ऊंची आवाज में डीजे बजा कर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अवहेलना नहीं किया बल्कि अधिकतर कांवड़ियों ने यातायात नियम को भी तोड़ा। कईयों ने रास्ते में उत्पात भी मचाया। पश्चिम दिल्ली के मोती नगर इलाके में सात अगस्त की शाम को एक युवती की कार कांवड़िए से हलके से छू हो जाने भर से कांवड़ियों ने खूब हंगामा किया। जमकर गाड़ी में तोड़फोड़ की। पूरे घटनाक्रम के दौरान घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी तमाशा देखते रहे। बुलंदशहर में तो कांवड़िये पुलिस से ही भिड़ गए। यहां तक की पुलिस की गाड़ी को तोड़ दिया।
आखिरकार आस्था के नाम पर नियम तोड़ने और उत्पात मचाने का लाइसेंस इन्हें कब तक मिलता रहेगा।

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