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कर्नाटक और राजयसभा पर रहेगी चर्चा 

 

आज बहुमत साबित करेंगे येदियुरप्पा

कर्नाटक में आज एक बार फिर नंबरगेम की बारी है। मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके येदियुरप्पा को आज विधानसभा में बहुमत हासिल करना है। बीजेपी का दवा है कि उनके पास 105 विधायकों का समर्थन है तो वहीँ विपक्ष इस सरकार के गठन को गलत बता रहा है ।

येदियुरप्पा ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इससे पहले की भाजपा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास मत जारी  विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कार्रवाई करते हुए बीते चार दिनों में 17 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया है। इस तरह येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 104 का आंकड़ा चाहिए।

कल रविवार को स्पीकर ने कांग्रेस-जेडीएस के 14 और बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। इससे पहले 25 जुलाई को भी स्पीकर ने कार्रवाई करते हुए तीन बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया था। अब तक स्पीकर  17 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता पर फैसला ले चुके हैं।

मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि वह बहुमत साबित करने को लेकर 100 फीसदी आश्वस्त हैं। और आज ही पिछली कांग्रेस-जेडीएस सरकार द्वारा तैयार किए वित्त विधेयक को किसी बदलाव के बगैर पेश करेंगे। विधेयक जल्दी पेश नहीं किया गया तो हम तनख्वाह देने के लिए फंड नहीं निकाल पाएंगे। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि स्पीकर का फैसला लोकतंत्र की जीत है। इससे भविष्य की राजनीति को सीख मिलेगी।

17 विधायकों की अयोग्यता पर फैसले के बाद अब 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में सदस्यों की संख्या 207 रह गई है। बहुमत परीक्षण के दौरान स्पीकर को हटाकर यह संख्या 206 होगी। ऐसे में येदियुरप्पा को बहुमत हासिल करने के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए। स्पीकर के फैसले से फ्लोर टेस्ट में येदियुरप्पा सरकार की राह और आसान हो गई। भाजपा के पास एक निर्दलीय को मिलाकर 106 विधायकों का  समर्थन है। जबकि कांग्रेस के पास 66, जेडीएस के 34 और एक बसपा विधायक है। विश्वास मत के दौरान कुमारस्वामी के पक्ष में वोटिंग नहीं करने पर बसपा ने अपने विधायक को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद मोदी सरकार पास करवा सकती है तीन तलाक बिल

तीन तलाक बिल हर बार की तरह इस बार भी लोकसभा में पास हो गया है लेकिन अब मोदी सरकार के सामने एक बार फिर राज्यसभा में इसे पास करवाने की चुनौती है. हालांकि एक रास्ता मोदी सरकार के पास है। विपक्ष के भारी विरोध के बीच तीन तलाक बिल लोकसभा से पास हो गया. वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 303 वोट, जबकि विरोध में 82 मत डाले गए.  वोटिंग से पहले संसद से जेडीयू, टीआरएस, कांग्रेस और टीएमसी  ने  वॉकआउट कर दिया. जेडीयू, टीएमसी वोट से अलग रहीं, वहीं, बीजेडी ने बिल के पक्ष में वोट किया. टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस बिल के खिलाफ रही. इससे पहले बिल पर चर्चा के दौरान लैंगिक न्याय  को नरेंद्र मोदी सरकार का मूल तत्व बताते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाने संबंधी विधेयक सियासत, धर्म, सम्प्रदाय का प्रश्न नहीं है बल्कि यह श्नारी के सम्मान और नारी-न्यायश् का सवाल है और हिन्दुस्तान की बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी इस पहल का सभी को समर्थन करना चाहिए।

केंद्र सरकार और विपक्ष राज्यसभा में एक बार फिर तीन तलाक बिल को लेकर आमने-सामने होंगे. इस दौरान सरकार मुस्लिमों के बीच तीन तालक को दंडनीय बनाने के लिए कुछ गैर एनडीए, गैर-यूपीए पार्टियों पर निर्भर रहेगी। बीजेपी के पास राज्य सभा में बहुमत नहीं है लेकिन उसने बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से पिछले सप्ताह सूचना का अधिकार विधेयक राज्य सभा में पारित कराया था. ऐसे में वह कई तरह के अंक गणित पर ध्यान दे रही है। जिससे राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पास करवाया जा सके।

तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पास कराने को लेकर भी बीजेपी को इन दलों से समर्थन की फिर से उम्मीद है, लेकिन चुनौती यह है कि एनडीए के साथी जनता दल द्वारा बिल का समर्थन नहीं करने का एलान किया गया है. ऐसे में  बीजेपी कैसे राज्यसभा में टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से तीन तलाक बिल को पास करवा सकती है। राज्य सभा में कुल 241 सांसद हैं और किसी भी बिल को पास करवाने के लिए 121 वोट चाहिए. बीजेपी के 78 सांसद राज्यसभा में हैं तो वहीं अन्य एनडीए  दलों की बात करें तो एआईडीएमके 11, जेडीयू 6, शिवसेना 3, शिरोमणी अकाली दल 3 और निर्दलीय और नामांकित 12 सासंद हैं।  इस तरह एनडीए के पक्ष में कुल 113 सांसदों का वोट तय माना जा रहा है लेकिन यह संख्या मेजोरिटी के 121 के मार्क से 8 वोट कम है ऐसे में अगर उसे बीजेडी के सात सांसद, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के 6, वाईएसआर कांग्रेस के दो सांसदों का साथ मिलता है तो बिल के समर्थन में 128 वोट पड़ेंगे और बिल आसानी से पास हो जाएगा।

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