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कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी ने थामा कांग्रेस का हाथ 

आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। इतना ही नहीं सियासी उठापटक और नेताओं का दल – बदल का दौर भी शुरू हो गया है। ऐसे में लगातार हर चुनाव में हार का सामना कर रही कांग्रेस अब  एक और प्रयोग की  तैयार कर रही है। कांग्रेस इस बार पार्टी आंदोलन से निकलने वाले युवाओं को संगठन में जगह देकर चुनावों में जीत की दहलीज तक पहुंचना चाहती है। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार  और गुजरात से विधायक व दलित नेता जिग्नेश मेवाणी पार्टी की इसी रणनीति का हिस्सा हैं। दोनों युवा नेता कांग्रेस में शामिल होंगे ।

 

 

कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी पार्टी की पूरे देश में युवाओं को साथ जोड़ने की योजना का हिस्सा हैं। पार्टी हर राज्य में युवाओं को साथ जोड़ने के लिए महाभियान चलाने की तैयारी कर रही है। यह पहला मौका नहीं है, जब कांग्रेस ने सियासत में नए प्रयोग करने की कोशिश की है। इससे पहले भी पार्टी कई प्रयोग कर चुकी है। हालांकि इन सभी प्रयोगों के परिणाम बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2007 में पार्टी महासचिव के तौर पर यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में आंतरिक चुनाव की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य संगठन में जमीनी युवा कार्यकर्ताओं को आगे बढने का मौका देना था। यह एक अच्छा प्रयास था, पर प्रदेशों में वरिष्ठ नेताओं के परिवारों से ताल्लुक रखने वाले युवा धनबल के जरिए खुद चुनाव जीतकर पदाधिकारी बन गए।

इसके बाद पार्टी ने 2014 के चुनाव में एक और प्रयोग किया। अमेरिका की तर्ज पर 16 लोकसभा सीट पर उम्मीदवार तय करने के लिए अंदरुनी लोकतंत्र की प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें उम्मीदवार के चयन के लिए उस क्षेत्र के पार्टी पदाधिकारी और नेताओं की राय ली जानी थी। पर कई सीट पर टिकट के दावेदारों के विरोध के बाद इस प्रयोग को बंद कर दिया गया।

 

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इसके बाद कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार तय करने के लिए डेटा का इस्तेमाल किया था। इसमें पार्टी के शक्ति ऐप ने भी अहम भूमिका निभाई थी। पार्टी ने 300 सीट पर डेटा के विश्लेषण के आधार पर उम्मीदवार तय करने का प्रयास किया, पर यह कोशिश भी सफल नहीं हो पाई थी। ऐसे में यह वक्त तय करेगा कि कन्हैया और मेवाणी के जरिए पार्टी युवाओं को जोड़ने में कितनी सफल रहती है।

 

 


प्रशांत किशोर ने दी थी राहुल गांधी को राय

 

 

पार्टी सूत्रों के मुताबिक , प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी को राय दी थी कि पुराने नेताओं का असर अब पार्टी में समाप्त हो गया है, इसलिए युवाओं को मौका देना चाहिए। इसलिए कन्हैया और जिग्नेश की कांग्रेस में एंट्री हो रही है। बता दें कि कन्हैया कुमार बीते डेढ़ सालों से राजनीति में कम सक्रिय हैं। उधर बिहार में कांग्रेस के नेता कन्हैया की एंट्री पर कुछ भी खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं। बताया जा रहा है कई वरिष्ठ नेता कन्हैया के आने से अपनी वैल्यू कम होने की आशंका जता रहे हैं। इससे पहले कन्हैया कुमार ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता अशोक चौधरी से भी मुलाकात की थी। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

बता दें फरवरी में हैदराबाद में सीपीआई की अहम बैठक हुई थी। इसमें कन्हैया कुमार द्वारा पटना में की गई मारपीट की घटना को लेकर निंदा प्रस्ताव पास किया गया था। बैठक में पार्टी के 110 सदस्य मौजूद थे जिसमें तीन को छोड़कर बाकी सभी ने कन्हैया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने का समर्थन किया था। इस घटनाक्रम के बाद कन्हैया की जदयू नेता से मुलाकात को अहम माना जा रहा था। कन्हैया बेगूसराय के रहने वाले हैं। उन्होंने 2019 में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ बेगूसराय से लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन यहां उन्हें बीजेपी के गिरिराज सिंह से हार मिली थी। 

बता दें कि कन्हैया कुमार को साल 2016 में जेएनयू परिसर के अंदर संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु की बरसी के मौके पर भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में जेल हुई थी। 

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