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जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा, फेक न्यूज अपने आप में कोरोना से अधिक खतरनाक

जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा, फेक न्यूज अपने आप में कोरोना से अधिक खतरनाक

देश में लगातार फेक न्यूज़ चलाने की संख्या बढ़ते जा रही है। नाम, जगह सब बदल कर गलत तरीके से न्यूज़ को सोशल मीडिया पर डाला जाता है। फिर लोग एक-दूसरे को फॉरवर्ड करते हैं। इस फेक न्यूज़ के कारण मॉब लिंचिग होता आया है। अब इस फेक न्यूज़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा है कि समाज के सभी वर्गों में सहनशीलता का स्तर घटता जा रहा है और बिना सोचे-समझे मैसेजेस फॉरवर्ड करने के कारण फेक न्यूज़ की संख्या बढ़ रही है।

यह बात जस्टिस कौल ने बीते रविवार को मद्रास बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन लेक्चर में कही है। जिसमें उन्होंने कहा, “आज के समय में बोलने की आजादी का विचार और विषय मुझे आकर्षित करता है। मुझे लगता है कि जिस विषय पर हम चर्चा कर रहे हैं, उसके संबंध में इस समय की चुनौतियां थोड़ी अलग हैं। खासतौर पर जिस तरीके से तकनीकि का विस्तार हुआ है, यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।”

लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस कौल ने कहा कि फेक न्यूज़ के प्रसार और गलत सूचना की समस्या के लिए तकनीकि विकास के कारण उपलब्ध हुए इन प्लेटफार्मों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। खासकर इस महामारी के समय फेक न्यूज़ की समस्या और बढ़ गई है। उन्होंने कहा, “फेक न्यूज़ अपने आप में कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक है। इसका असर कई गुना ज्यादा है। उन्होंने सहिष्णुता को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि एक वर्ग जो दूसरे को असहिष्णु कहता है, खुद भी असहिष्णु हो जाता है।

उन्होंने आगे कहा, पिछले कई सालों से विभिन्न वर्गों में सहिष्णुता का स्तर गिरता जा रहा है। इसके अलावा अलग-अलग विचार रखने के कारण लोगों को ‘अर्बन नक्सल’ और ‘मोदी-भक्त’ कह दिया जाता है। इसके कारण मुक्त विचार-विमर्श का दायरा भी खत्म होता जा रहा है। जज कौर ने कहा, “हमें बिना सहमत हुए एक दूसरे के विचारों को समझना होगा और एक दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए और यदि आपको कोई किताब नहीं पसंद है, तो उसे फेंक दीजिए।”

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