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बाबा के ‘बुलडोजर जस्टिस’ से नाराज होने वाले जज हुए सस्पेंड

“यूपी में हो रहे अन्याय के ख़िलाफ़ अपर ज़िला जज श्री मनोज कुमार शुक्ला के मामले का तुरंत न्यायिक संज्ञान लिया जाए। जब न्यायालय से जुड़े व्यक्तियों के साथ ऐसा हो रहा है तो आम जनता के साथ क्या होगा। ये बदहाल क़ानून-व्यवस्था का निकृष्टतम उदाहरण है।”
25 मार्च को यह ट्वीट किया था पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने। इस दिन सुल्तानपुर में अपर जिला जज मनोज शुक्ला प्रशासन के बुलडोजर के आगे लेट गए थे। प्रशासन का यह बुलडोजर उनके खेतों से मिट्टी उठा रहा था। जहां एक नहर को बनाया जाना था । सुल्तानपुर के अपर जिला जज ने पुलिस प्रशासन पर उनके खेत में जबरन मिट्टी खोदने का आरोप लगाकर काम रोक दिया था ।
इसके बाद अपर जिला जज मनोज शुक्ला को हाई कोर्ट इलाहाबाद के आदेश पर सस्पेंड कर दिया गया है। इसी के साथ ही उन्हें सोनभद्र से संबंध कर दिया गया है।
 गौरतलब है कि जब भी कोई जनहित का सरकारी काम होता है तो प्रशासन जमीन अधिग्रहण कर लेता है। इसका मुआवजा दिया जाता है। अगर कोई मुआवजा नही लेता है और इसका विरोध करता है तो इसके बावजूद भी न्यायालय में मुआवजा जमा करके प्रशासन जनहित के कार्यों को सुचारू बनाए रखता है।
लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या एक न्यायिक जज को जनहित में जमीन अधिग्रहण करने के कानून का पता नहीं है या वह जानबूझकर नहर निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं ‌।
 गौरतलब है कि ए डी जे मनोज शुक्ला अपने गांव छपिया में उस समय पहुंचे थे जब प्रशासन वहां से एक नहर निकालने के लिए खुदाई कर रहा था। यह नहर हरैया राजवाहा है। जिसकी खुदाई 28.5 किलोमीटर तक की जानी है।
अपर जिला जज प्रशासन द्वारा उनके खेतों में की जाए नहीं खुदाई का न केवल विरोध करते हैं बल्कि पूरी रात प्रशासन के सामने अपनी जमीन पर ही धरना देकर बैठ जाते हैं। इस दौरान वह शासन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए भी नजर आए। जिसमें उन्होने अधिशासी अभियंता और जिलाधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं। उनका आरोप लगाने वाला वीडियो भी वायरल हो रहा है।
इस बाबत एडीजे मनोज शुक्ला का कहना है कि जिस जमीन पर खुदाई की जा रही है वह मेरी पुश्तैनी जमीन है। जहां पर कब्जा किया जा रहा है। साल 2013 का जमीन अधिग्रहण का जो नया एक्ट है, उसका पालन नहीं हो रहा है।
 डीएम के आदेश पर यहां कार्य हो रहा है। जो डीएम ने आदेश किया है वो भ्रष्टाचार से युक्त आदेश है। ये जमीन का अधिग्रहण तभी कर सकते थे, जब ये हमको उसका धन देते, हमको अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला है।

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