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निर्मल पाण्डे फ़िल्म फेस्टिवल के जज पैनल की घोषणा 

ऋषिमम प्रोडक्शन एवं एसोसिएट पार्टनर चम्बल सिने प्रोडक्शन द्वारा अभिनेता एवं गायक निर्मल पाण्डेय की स्मृति में आयोजित ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टिवल 2020 की फ़िल्म एंट्री 15 जून से खुल रही है।
फेस्टिवल संस्थापक एवं टीवी निर्देशक अनिल दुबे जी व सह संस्थापक, फेस्टिवल असिस्टेंट रवीन्द्र चौहान ने जज पैनल के नाम की घोषणा के साथ पोस्टर रिलीज किया

 

इस फ़िल्म फेस्टिवल के संस्थापक व फेस्टिवल निदेशक अनिल दुबे और जाने-पहचाने फ़िल्म एवं टेलीविजन निर्देशक व सह संस्थापक एवं फेस्टिवल असिस्टेंट रवीन्द्र चौहान ने संयुक्त रूप से आज फेस्टिवल के जज पैनल की घोषणा की। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्टर रिलीज करते हुए जज पैनल की जानकारी दी।

फेस्टिवल में टीवी अभिनेत्री आभा परमार, टीवी अभिनेत्री सादिया सिद्दीकी, फ़िल्म समीक्षक व नाट्य लेखक सुनील मिश्र, लेखक फ़िल्म समीक्षक डॉ कुमार विमलेन्दु, टीवी अभिनेता आरिफ शहड़ोली और लेखक-निर्देशक अशोक मेहता जज हैं।

टीवी अभिनेत्री आभा परमार

 

आभा परमार :  आभा परमार ने अपने अभिनय की शुरुआत रंगमंडल भोपाल से आरंभ की। बुआ, ताई के किरदार से पहचान बनाने वाली आभा परमार ने स्नातक की शिक्षा पूर्ण करने के बाद 1980 में अभिनय यात्रा के लिए मुम्बई का रुख किया। रंगमंच करते हुए 1989 में अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ‘मैं आज़ाद हूँ’ से अपनी फिल्मी पारी का शुभारंभ किया। 11 जुलाई 1963 को ग्वालियर में जन्मी आभा परमार ने सुई धागा, स्पेशल 26, मुन्ना पाण्डेय बेरोजगार, रामजी लन्दन वाले जैसी फिल्मों में अभिनय किया।  टीवी सीरियल इस प्यार को क्या नाम दूं, दिल से दिल तक, यह उन दिनों की बात है, नागिन, नागिन 2,नीली छतरी वाले, पुनः विवाह, एक थी रानी एक था राजा, हमको हो गया प्यार क्या करें, सबसे बड़ा रूपया में प्रमुख किरदारों से रंग भरा है।

सिने समीक्षक एवं लेखक सुनील मिश्र

 

सुनील मिश्र : सिनेमा में सर्वोत्तम लेखन के लिए राष्ट्रपति से नेशनल अवार्ड प्राप्त भोपाल मध्यप्रदेश में जन्मे देश के जाने माने सिने लेखक व समीक्षक  सुनील मिश्र माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वर्तमान में संस्कृति विभाग भोपाल में कार्यरत हैं। बचपन में “सत्यकाम” फ़िल्म देखने के बाद से ही फिल्मों में रुचि से शुरू हुआ यह कारवां आज तक चल रहा है। “दो अंजाने” फ़िल्म की समीक्षा से अपने इस कैरियर की शुरुआत की। सुनील जी की खासियत यह है कि ये फिल्मों को निर्देशक के दृष्टिकोण से देखते हैं फिर उसकी समीक्षा करते हैं। देश-विदेश के अनेक अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म में सिनेमा पर बेहतरीन समीक्षा की है। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के अलावा अनेक चैनलों के लिए उन्होंने सिनेमा केन्द्रित कार्यक्रमों का समन्वय-संयोजन किया है। वह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व वि़द्यालय के अनेक सत्रों में फिल्म पत्रकारिता की कक्षाएं भी लेते रहे हैं। देश में सिनेमा पर एकाग्र अनेक वैचारिक समारोहों में व्यख्यान देते हैं। अभिनेता अमिताभ बच्चन पर किताब एक दशक पहले लिख चुके हैं।

फ़िल्म समीक्षक, लेखक मोटिवेशन स्पीकर डॉ कुमार विमलेन्दु

 

डॉ कुमार विमलेन्दु : पाटलिपुत्र की ऐतिहासिक धरती पर जन्मे और काशी की ज्ञान परंपरा में दीक्षित, अंग्रेज़ी साहित्य में पी.एच.डी. डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह, शिक्षा और साहित्य जगत में एक जाना-माना नाम हैं। फ़िल्म समालोचक के तौर पर भी कई बड़े सिने कलाकारों ने इनकी समीक्षाओं को खूब सराहा है| देश के कई प्रसिद्ध अख़बारों और पत्रिकाओं में बतौर स्तंभकार, ये लगातार लिखते हैं| साहित्य और सिनेमा को जोड़ती है इनकी लेखनी| अंग्रेज़ी, हिन्दी और उर्दू पर समान अधिकार रखते हैं डॉ. कुमार विमलेन्दु सिंह| इनकी पहली कृति  “ईव इन डिसट्रेस”, अंग्रेज़ी में प्रकाशित हुई जो कि इन्होंने अपनी पत्नी डॉ. रंजीता तिवारी के साथ मिलकर लिखी थी। इसे अकादमिक जगत में बहुत प्रशंसा मिली। “मैं विद्रोही, मैं यायावर (हिन्दी कविता संग्रह)” और “To Whomsoever…(Short Stories Collection)” ने इन्हें हिन्दी और अंग्रेज़ी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई। साहित्य सृजन के अलावा, इनका संगीत और नाटकों के क्षेत्र में भी प्रशंसनीय हस्तक्षेप है। अखिलेन्द्र मिश्रा, टाम आल्टर और गिरीश कर्नाड जैसे दिग्गजों के सान्निध्य में इन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है और दूरदर्शन पर कई साहित्यिक कार्यक्रमों का संचालन किया है। ये कई संगीत कार्यक्रमों में पुरस्कृत हुए हैं। इन्हें ऑयल राजभाषा सम्मान से भी सम्मानित किया गया है।

टीवी एवं फ़िल्म अभिनेता आरिफ़ शहड़ोली

 

आरिफ शहड़ोली : भारतेन्दु नाट्य अकादमी से नाट्य कला में स्नातक, NSD दिल्ली व FTII पूना से प्रशिक्षित आरिफ शहड़ोली ने लापतागंज, चिड़ियाघर, नीली छतरी वाले, पीटरसन हिल्स, देवों के देव महादेव, महाकुंभ, जोधा अकबर, यम है हम, बंधन, रजिया सुल्तान, महाभारत, हातिम, एक घर बनाऊंगा, हर शाख पे उल्लू बैठा है, बीच वाले बापू सब देख रहा है, कृष्ण कन्हैया टीवी सीरियल में अभिनय किया है। बॉलीवुड की रावण, बैंक चोर, एलेक्स हिंदुस्तानी, तिल्ली फिल्मों के साथ क्षेत्रीय फिल्में फैंटास्टिक दुल्हनियाँ, सन ऑफ फ्लॉवर में अभिनय की छाप छोड़ी है। बुन्देली एलबम और वृत चित्र के साथ अनेक अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल के जज के रूप में सेवा दी है। देश के कोने-कोने में युवा पीढ़ी को नाट्य कार्यशाला का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पत्रिका व समाचार पत्रों में अनेक कहानियां, नुक्कड़ नाटक प्रकाशित हो चुके हैं।

टीवी अभिनेत्री सादिया सिद्दीकी

 

सादिया सिद्दीकी : बालिका-वधू में संध्या का किरदार के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस विजेता सादिया सिद्दीकी ने अपने फिल्मी जीवन का शुभारंभ 1994 में शाहरुख खान के साथ फिल्म कभी हाँ कभी ना से किया जिसमें शाहरुख खान की बहन का किरदार किया। कत्थक नृत्य में परंपरागत सादिया सिद्दीकी ने काली सलवार, सिटी लाइट्स,  किल द रेपिस्ट, अज्जी, तक्षक,बग्गा बीच, जस्ट मैरिड, शब्द, बॉम्बे समर, रघु रोमियो, हिटलर फिल्मों में अभिनय किया है। 1993 में ब्योमकेश वक्क्षी टीवी सीरियल में रजनी के किरदार से टीवी जगत में कार्य कर रही सादिया बनेगी अपनी बात, यह उन दिनों की बात है, रंग रसिया, ससुराल गेंदा फूल, चश्मेबद्दूर में अभिनय किया है।  1993 में हॉलीवुड की फ़िल्म लिटिल बुद्धा में अभिनय किया है।

लेखक, रंगकर्मी एवं निर्देशक अशोक मेहरा

 

अशोक मेहरा  : 1956 को मेरठ में जन्मे अशोक मेहरा स्नातक तक शिक्षा प्राप्त कर रंगमंच में सक्रिय हो गए। इनके पिता मेरठ के एक सिनेमा हाल में बतौर मैनेजर काम किया करते थे, इसलिए हर फिल्म देखने का अवसर मिल जाता था। सिनेमा की प्रोजेक्शन की टेक्निक के अतिरिक्त फ़िल्म से जुड़े सिनेमेटोग्राफी, निर्देशन, कॉस्ट्यूम, एडिटिंग, लाइटिंग व एंगेल आदि की फ़िल्म को बार बार देखने से अनुभव मिला । रंगमंच से वर्ष  1973 में जुड़े और मेरठ के यंग बीटल्स क्लब, मेरठ इप्टा में अनेक मंचित नाटकों में भाग लिया । अनेक बार भारत में आयोजित नाट्य महोत्सवों में बेस्ट एक्टर का अवार्ड्स मिला। राँची ( झारखंड ) में प्रवास के दौरान दूरदर्शन के अनेक नाटकों और टेली फिल्मों में अभिनय किया। शिमला, मेरठ, आगरा, नैनिताल आदि शहरों में आयोजित नाट्य महोत्सवों में निर्णायक रूप में सेवाएं प्रदान की। इंटरनेशनल फ़िल्म महोत्सवों में भी दो बार निर्णायक रहे। मेहरा जी ने अनेक शॉर्ट फिल्म में निर्देशक के रूप में कार्य किया ।

 

फेस्टिवल में मीडिया पार्टनर के तौर पर साहित्यिक पत्रिका ‘ पाखी‘, साप्ताहिक समाचार पत्र ‘दि संडे पोस्ट’, नव प्रवाह, बुन्देली बौछार, तेजस खबर, न्यूज़ चैनल चम्बल, न्यूज़ टाइम्स, हिंदुस्थान समाचार, संदेश वाहक की सहभागिता है। शोभा अक्षर, अमित द्विवेदी, सचिन चौधरी, शिवम दुबे, दीपक श्रीवास्तव, रोहित सिंह चौहान, नीलकमल, आशुतोष जी, जनार्दन जी, विजय जी के सहयोग से यह फेस्टिवल अपने मुक़ाम की ओर अग्रसर है।

फ़िल्म फेस्टिवल में संस्थापक सदस्य सलाहकार मिथलेश पाण्डेय, तकनीकी हेड ऋत्विक ऋषभ, मीडिया हेड कविता गाँधी, प्रोग्राम हेड प्रशान्त पचौरी, डिज़ाइन कंसलटेंट ईशा दुबे, सहयोगी सदस्य अमित योगी, शीलेन्द्र प्रताप सिंह, कल्पना रघुवंशी, सतीश कुमार हैं।

-जनार्दन कुमार सिंह 

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