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पत्रकार अहसान अंसारी की हुई बेल, मित्र पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान

पत्रकार अहसान अंसारी की हुई बेल, मित्र पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं”। आज एक बार फिर यह उक्ति चरितार्थ हुई हैं। हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार अहसान अंसारी के मामले में आज उस समय सफलता मिली जब उनकी हाईकोर्ट नैनीताल से बेल स्वीकृत हो गई। हाईकोर्ट नैनीताल के जज आलोक कुमार वर्मा ने बकायदा बेल के आर्डर दिए हैं। यह केस की सुनवाई हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शशिकांत सांडिल्य ने की। इससे पहले हरिद्वार न्यायालय ने अहसान की बेल खारिज कर दी थी।

आज अहसान अंसारी को एक महीना 5 दिन बाद मिली बेल से हरिद्वार के पत्रकार जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि ‘दि संडे पोस्ट’ के गढ़वाल ब्यूरो चीफ एहसान अंसारी के मामले में मित्र पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लगे हैं।

इस मामले में हरिद्वार पुलिस की छवि धूमिल हुई है। वह दूसरी बात है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पत्रकार अहसान अंसारी मामले में अपनी किरकिरी होते देख ज्वालापुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष योगेश देव सिंह का स्थानांतरण कर दिया था।

इस मामले में प्रदेशभर की श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने अहसान अंसारी को पुलिस द्वारा फर्जी तरीके से फसाए जाने और जेल भेजने का जमकर विरोध किया था। इस बाबत हरिद्वार के पत्रकारों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी । इसी के साथ गंगा की अविरल धारा को बचाने की लडाई लड रहे मातृ सदन ने भी इस प्रकरण में हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र लिखकर ज्वालापुर कोतवाल योगेश देव सिंह के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की थी।

दूसरी तरफ ‘दि संडे पोस्ट’ ने अहसान अंसारी प्रकरण पर बकायदा एक वेबीनार आयोजित किया था। जिसमे पत्रकारों पर हो रहे फर्जी मामलो पर पूरे ढाई घंटे तक डिबेट चली थी। इसमें प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ ही एहसान अंसारी के पुत्र आरिफ खान और सोशल वर्कर श्वेता मासीवाल के अलावा प्रदेश सरकार के निशाने पर रहे वरिष्ठ पत्रकार शामिल रहे थे।

जिनमें पत्रकारों ने अपनी आपबीती बताते हुए त्रिवेंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह सरकार को सच का आइना दिखाने वाले पत्रकारों को जबरन फर्जी मुकदमे दर्ज करके जेल भेज रही है । इससे पहले ‘दि संडे पोस्ट’ के संपादक अपूर्व जोशी ने सोशल मीडिया के जरिए लाइव प्रोग्राम में अहसान अंसारी पर उत्तराखंड पुलिस द्वारा किए गए जुल्मों-सितम का सिल-सिलेवार ब्यौरा दिया था। जिसमें अपूर्व जोशी ने यह भी खुलासा किया था कि पिछले साल जब एहसान अंसारी पर ऐसा ही एक फर्जी मामला दर्ज हुआ था।

तब प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस मामले में हरिद्वार के एसएसपी को ज्वालापुर कोतवाली से अंसारी के मामले को दूसरी कोतवाली में ट्रांसफर करने की बात कही थी। लेकिन ज्वालापुर कोतवाल के प्रेम में लीन हरिद्वार एसएसपी ने अपने सीनियर ऑफिसर के आदेशों को भी दरकिनार कर दिया था। यह बात जब सीनियर ऑफिसर तक पहुंची तो इस बार एसएसपी को अपने चहेते इस्पेक्टर योगेश देव को स्थानांतरित करना पड़ा था।  जिसके चलते अंसारी प्रकरण में निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ गई है।

याद रहे कि  पिछले साल भी अहसान अंसारी पर दर्ज हुए एक फर्जी मामले में भी ज्वालापुर कोतवाल योगेश देव सिंह की अहम भूमिका रही थी। जिसकी शिकायत अहसान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन व अन्य मंचों पर की थी। तभी से इंस्पेक्टर योगेश देव अहसान अंसारी से रंजिश रखने लगा था और ज्वालापुर क्षेत्र में सक्रिय फर्जी पत्रकारों और कुछ छूटभैये नेताओं के साथ मिलकर अंसारी को झूठे मुकदमे में फंसने के जाल बुन रहा था।

गौरतलब है कि खुद को पत्रकार कहने वाली अर्चना ढींगरा और नौशाद अली के बीच गाली गलौज का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अर्चना ने 15 मई को एसएसपी हरिद्वार को एक शिकायती पत्र दिया था। जिसमें अहसान अंसारी का नाम शामिल नहीं था।

लेकिन कोतवाल योगेश देव सिंह ने अर्चना धींगरा और नौशाद अली के साथ मिलकर अहसान अंसारी को फंसाने का पूरा षड्यंत्र रचा और महिला से एक दूसरी फर्जी तहरीर लिखवाते हुए उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया। 16 मई को अंसारी को पुलिस ने उठाया और 7 घंटे तक अवैध हिरासत में रखने के बाद कोर्ट में पेश किया। जहां अंसारी को 17 मई को जेल भेज दिया गया था।

इस प्रकरण पर प्रेस क्लब हरिद्वार के डायरेक्टर जोगिंदर मावी से जब बात हुई तो उन्होंने अहसान अंसारी की बेल को चौथे स्तंभ की जीत बताया। साथ ही अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार जोगेंद्र मावी ने कहा कि इस मामले में ज्वालापुर के पूर्व कोतवाल योगेश देव सिंह ने रंजिशन अहसान अंसारी पर फर्जी मामला दर्ज कराया था ।

उसका कारण अंसारी द्वारा कोतवाल की करतूतों को उजागर करना था। जिससे पुलिस परेशान थी। हालांकि कोतवाल का स्थानांतरण होने से ही चौथे स्तंभ की जीत हुई है। पत्रकार जोगिंदर मावी उम्मीद जताते हैं कि अहसान अंसारी जेल से बाहर आते ही एक बार फिर सरोकारी पत्रकारिता का सफर जारी रखेंगे। हरिद्वार के हम सभी पत्रकार उनके साथ हैं।

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