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कही छवि बदलने की छटपटाहट तो नहीं JNU का रामायण वेबिनार

कही छवि बदलने की छटपटाहट तो नहीं JNU का रामायण वेबिनार

याद कीजिए 18 नवंबर, 2019 का वह दिन जब हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि ने कहा था कि ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ कहना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कम फीस का लाभ उठाने के लिए एक शर्त होनी चाहिए। हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि ने विश्वविद्यालय में पढ़ रहे अधिकांश विद्यार्थियों को ‘भारत विरोधी’ करार देते हुए कहा कि उनकी इस मांग के पीछे का तर्क यही है कि वहां के छात्र ‘राष्ट्र-विरोधी’ हैं।

पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि जय श्री राम तो एक धार्मिक नारा है तो तब उन्होंने कहा कि जो भगवान श्रीराम का नाम लेगा, वह मर्यादित रहेगा। अगर आप उनका नाम नहीं लेना चाहते, तो आप ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ तो कह सकते हैं। यह तो बोल सकते हो। ऐसा करना देशभक्ति है। उन्होंने जेएनयू विद्यार्थियों को ‘पीजा-बर्गर वाला’ करार देकर ‘संस्कारों की कमी वाला’ कहा।

इसी तरह एक दूसरे प्रकरण में जेएनयू परिसर में 5 दिसम्बर को सुबह 9 बजे आरएसएस संरक्षित स्वदेशी जागरण मंच की श्रीराम मंदिर संकल्प रथयात्रा जत्थे ने प्रवेश किया और हलचल मचा दी थी। करीब एक घंटे परिसर में इस जुलूस ने मार्च किया और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर जमकर नारेबाजी की थी। जुलूस और नारेबाजी जेएनयू के लिए आम बात है। नयी बात है, आरएसएस के जत्थे का वहां घुसना और अपने वर्चस्व को प्रदर्शित करना।

हिंदू महासभा सहित तमाम हिंदू संगठनों के द्वारा सदा ही राष्ट्र विरोधी कहे जाने और इस बात को लेकर निशाने पर रहा जेएनयू अब कही अपनी कट्टर वामपंथी विचारधारा की छवि बदलने की छटपटाहट में तो नही है। शायद यही वजह माना जा रहा है कि जेएनयू में अब रामायण पर वेबिनार दिखाई जाएगी।

इसके लिए अब तक करीब दो हजार आवेदन हो चुके हैं। इस वेबिनार में जेएनयू के छात्र, शिक्षक और स्टाफ पार्टीशिपिएट करेगा। आपको बता दें कि इससे पहले जेएनयू में कोविड-19 की चुनौतियों और समाधान विषय पर भी वेबिनार हो चुका है। इस सेमिनार में विदेशों से भी विद्यार्थियों ने भाग लिया था।

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू इस समय रामायण के एक पाठ आयोजन कार्यक्रम की वजह से चर्चा में है। यहां जूम ऐप पर एक लाइव कार्यक्रम होगा जिसका विषय होगा “रामायण से नेतृत्व के सबक”। इस विषय पर पहली बार होने वाला वेब आधारित यह कार्यक्रम वेबीनार कहलाएगा। यह वेबीनार 2 मई से 4 मई तक शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक चलेगा। 2 दिन तक सिर्फ 4 घंटे चलने वाले इस रामायण पाठ ने जेएनयू को राजनीति का अड्डा बना दिया है।

फिलहाल, जेएनयू में रामायण की वेबीनार पर महाभारत छिड़ गई है। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह कोरोना महामारी के बीच एक साजिश के तहत किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के एनएसयूआई के एक कार्यकर्ता मुकेश कुमार ने कहा कि कोरोना के समय उससे लड़ने की बजाय यूनिवर्सिटी के वीसी और सरकार मिलकर षड़यंत्र कर रहे हैं। जबकि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर एम जगदीश कुमार इसके पक्षधर है।

प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने ट्विटर पर लिखा हैं कि महात्मा गांधी ने 1946 में कहा था कि भगवान राम अपने आप में गुरु और स्वामी हैं। महात्मा गांधी ने भगवान राम के बारे में कहा था कि राम से बड़ा कोई नहीं है और वह निराकार, निरंतर और बेदाग हैं। मेरा राम ऐसा है।आगे लिखा कि जेएनयू ‘रामायण से नेतृत्व के सबक’ सेमिनार का आयोजन कर रहा है। ये सेमिनार जेएनयू में छात्रों को लीडरशिफ सिखाए जाने के लिए रामायण पर आयोजित किया जा रहा है।

साथ ही एम जगदीश कुमार दलील देते हैं कि रामायण में ऐसे बहुत से घटनाक्रम हैं जिसे सीखकर जीवन को इस कोरोना महामारी के चुनौतीपूर्ण समय में जीवन को बेहतरीन बना सकते हैं। छात्र भी रामायण से सीख ले सकें और अपने अंदर बेहतर नेतृत्व क्षमता का विकास कर सकें, इसलिए जेएनयू में वेबीनार आयोजित किया जा रहा है।

इधर, एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव और जेएनयू के प्रभारी सन्नी मेहता ने कहा कि भगवान राम को मानने वाले लोग हैं, हम स्वागत करते हैं। हमारी भगवान राम से प्रार्थना है कि ये सरकार व वाइस चांसलर भी भगवान राम के दिखाए रास्ते में चलेंगे। कोरोना की वजह से गरीबों की मदद में एनएसयूआई के कार्यकर्ता लगे हैं। हमारे लिए यही भगवान राम की पूजा है।

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