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विवादों चलते फिर चर्चा में जेएनयू

दिल्ली का जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर से चर्चाओं में है। इस बार छात्रों के दो गुटों के बीच भोजन को लेकर विवाद हुआ है। विवाद इतना बढ़ गया कि इसमें कई छात्र घायल हो गए हैं जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद तमाम छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों का कहना है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र इकाई है, के सदस्य जेएनयू कैंपस में छात्रों को मांसाहार भोजन खाने से रोकने पर उतर आए जिसके चलते छात्रों के बीच भारी हिंसा हो गई। इस दौरान कई छात्र घायल हो गए। इसी हिंसा के विरोध में छात्रों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर भी विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद छात्रों को हिरासत में ले पुलिस थाने ले जाया गया।

दरअसल, जेएनयू के कावेरी हॉस्टल में रामनवमी के मौके पर चिकन बनाए जाने को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लगभग 30-40 छात्रों के एक समूह ने कथित तौर पर हंगामा किया। हंगामा इतना बढ़ गया कि इसमें कई छात्र घायल हो गए। इस घटना में घायल होने के कारण पांच छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जेएनयू के छात्रों के मुताबिक, एबीवीपी के छात्र पहले से हॉस्टल में मांसाहारी भोजन बनाने को लेकर आपत्ति जता रहे थे। इस मामले पर दिल्ली पुलिस ने लेफ्ट के छात्रों की शिकायत पर एबीवीपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार जेएनयू के छात्र संगठन एसएफआई, डीएसएफ और ‘आइसा’ के सदस्यों छात्रों के समूह ने अज्ञात एबीवीपी के छात्रों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। इसके बाद आईपीसी की धारा 323, 341, 506, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आइसा ने 10 अप्रैल को एक बयान जारी कर कहा कि जेएनयू के कावेरी हॉस्टल में डिनर के लिए चिकन बन रहा था। तभी एबीवीपी के छात्र आए और ‘गुंडागर्दी’ शुरू कर दी। हॉस्टल के मेस में चिकन बनता है और शाहकारी छात्रों के लिए पनीर बनता है। लेकिन शाम को एबीवीपी के छात्र आए और चिकन बनाने का विरोध करने लगे। जब छात्रों ने इसका विरोध किया तो मारपीट करने लगे जिसमें कई छात्रों को चोट लग गई। इस बयान के बाद एबीवीपी ने भी एक बयान जारी करके कहा कि नवरात्र में कावेरी हॉस्टल में दोपहर में पूजा होनी होनी थी, लेकिन लेफ्ट के छात्रों के हंगामे के कारण पूजा देर से शुरू हो पाई। गौरतलब है कि जेएनयू में शांतिपूर्ण तरीके से इफ्तार और रामनवमी मनाई जा रही थी। लेकिन लेफ्ट को यह न तो देश में मंजूर है न कैम्पस में। कैम्पस की शांति को भंग करने के लिए लेफ्ट ने मांसाहारी का मुद्दा उछाला है। लेफ्ट जबरन एबीवीपी को इस मामले में जोड़ने की कोशिश कर रहा है। एबीवीपी का यह भी कहना है कि वामपंथियों ने एबीवीपी कार्यकताओं और जेएनयू के छात्रों पर हमला किया है। इस ‘नक्सली’ हमले में एबीवीपी कार्यकर्ता रवि राज गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

इस घटना के बाद ‘आइसा’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी का कहना था कि हमारे संगठन की एक छात्रा पर ईंट से हमला किया गया था और अन्य पर ट्यूबलाइट, फ्लावरपॉट और डंडों से हमला किया गया। इस दौरान पुलिस के कई अधिकारी वहां मौजूद थे। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। रामनवमी के मौके पर मेस में डिनर के लिए चिकन आने को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी। आरोप है कि इन छात्रों ने पहले मेस अधिकारियों से खाना कैंसल करने को कहा और फिर चिकन लेकर आए फूड कॉन्ट्रैक्टर के साथ मारपीट भी की और चिकन लौटा दिया।

इस हिंसा के कई कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें से एक में एक छात्रा अख्तरिस्ता अंसारी के सिर से खून निकलता दिख रहा है। अधिकारियों ने ऐसे वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘जेएनयू कैंपस में 10 अप्रैल 2022 को छात्र समूहों के बीच हाथापाई हुई थी। यह सब रामनवमी के अवसर पर हुआ था और कावेरी छात्रावास में छात्रों द्वारा हवन का आयोजन किया गया था। जबकि छात्रों के एक समूह ने इसका विरोध किया था। छात्रों के वार्डन और डीन ने छात्रों को शांत करने का प्रयास किया और हवन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। इसके बावजूद, छात्रों का कुछ समूह इससे खुश नहीं था और रात के खाने के तुरंत बाद वहां पर हंगामा खड़ा हो गया। जब छात्रों के बीच हंगामा हो रहा था तो वार्डन ने नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि मांसाहारी भोजन परोसने पर कोई रोक नहीं है।’ इस हिंसा के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति एसडी पंडित ने छात्रों से कहा है कि ‘कैंपस में इस तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’

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