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संकट में झारखण्ड ऊर्जा निगम ,केंद्र ने लगाया 118 करोड़ का जुर्माना

कोयला मंत्रालय द्वारा ऊर्जा विभाग की कंपनी झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम (जेयूयूएनएल) पर बनहरदी कोल ब्लॉक की समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं करने के कारण आवंटन की शर्तों के मद्देनजर 118 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सूत्रों के अनुसार अब झारखंड सरकार कोयला मंत्रालय से इस जुर्माने के लिए किए गए शो कॉज को वापस लेने का अनुरोध करेगी। कोयला मंत्रालय द्वारा झारखंड को 18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले बनहरदी कोल ब्लॉक का आवंटन थर्मल पावर प्लांट में कोयले की जरूरत को पूरा करने के लिए किया था। इस कोल ब्लॉक से ही पतरातू में बन रहे सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन को कोयले की आपूर्ति होनी है।

मंत्रालय ने झारखंड को बनहरदी कोल ब्लॉक सबसे पहले 2006 में आवंटित किया था । जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार होने में देरी एवं अन्य कारणों से 2011 में यह आवंटन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद फिर 2012 में कोयला मंत्रालय ने यह कोल ब्लॉक झारखंड को आवंटित किया। भूतत्व विभाग से जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार कराने के लिए पत्राचार शुरू हुआ और 2013 में खनन प्रारंभ हुआ। अगले डेढ़ वर्षों में करीब 10 वर्ग किलोमीटर में कोयला खनन शुरू होने लगा और जियोलॉजिकल रिपोर्ट का ड्राफ्ट बिजली बोर्ड को समर्पित किया गया। तभी भारत सरकार में कोलगेट प्रकरण उजागर होने पर बनहरदी कोल ब्लॉक का आवंटन एक बार फिर रद्द कर दिया गया।

जांच में झारखंड को हुए आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं मिलने पर 2015 में यह कोल ब्लॉक फिर से आवंटित हुआ, लेकिन आवंटन की शर्त के मुताबिक 22 महीने की समय सीमा में जियोलॉजिकल रिपोर्ट नहीं बनी और 48 महीने बीत गए। शर्त के मुताबिक खनन की पूरी कार्ययोजना भी समर्पित नहीं की गई, जबकि कोयला मंत्रालय ने झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम को तीन बार शो कॉज किया। अब कोयला मंत्रालय ने पिछले महीने फिर उत्पादन निगम को शो कॉज किया है। इस बार आवंटन के लिए राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा जमा 240 करोड़ और प्रॉस्पेक्टिंग फीस 50 करोड़ कुल 290 करोड़ पर 50 फीसदी करीब 118 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना जब्त करने की बात की गई है।

वंदना दादेल, ऊर्जा सचिव द्वारा कहा गया कि बनहरदी कोल ब्लॉक के आंवटन की पहली शर्त जियोलॉजिकल रिपोर्ट भूतत्व विभाग से तैयार करा ली गई है। अब कार्ययोजना को दोबारा से तैयार कराया जा रहा है। निरंजन कुमार झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक,द्वारा कहा गया कि यह सही है कि 48 महीने काम धीमा हुआ। लेकिन अब पहली बार जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार हो गई है। इसी के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार होनी है। जुर्माना वापस लेने के लिए सरकार की ओर से कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया जाएगा।

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