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पिता के पदचिन्हों पर जयंत

कहते हैं कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता। जहां अपना फायदा होता है वहां कोई भी नियम कायदा नहीं होता। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे तमाम उदाहरण सामने आ चुके हैं। चाहे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन हो या फिर रालोद और समाजवादी पार्टी का गठबंधन। दोनों पार्टियों ने अपने फायदे के लिए सारे नियम कायदे कई बार ताक पर रख दिए। अब राजनीति में एक और उदाहरण सामने आने को तैयार है। यह उदाहरण राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी का है। जयंत धीरे-धीरे अपने पिता स्वर्गीय अजीत चौधरी के पदचिह पर चलने लगे हैं, जिस तरह सत्ता से बहुत दिन तक दूर न रहने की आदत के चलते चौधरी अजीत सिंह किसी भी पार्टी से हाथ मिला लेते थे उसी तरह अब जयंत चौधरी भी अपने फायदे का सौदा करने में माहिर हो रहे हैं। चर्चा जोरों पर है कि आगामी लोकसभा चुनाव जयंत चौधरी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़ेगी। हालांकि भाजपा के साथ जाने की बात को राष्ट्रीय लोक दल के नेता सिरे से खारिज कर रहे हैं लेकिन हाल ही में उनके द्वारा किए गए ट्वीट और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

दरअसल, राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी का एक ट्वीट काफी चर्चा में है। उन्होंने ट्वीट किया था कि खिचड़ी, पुलाव, बिरयानी जो पसंद है खाओ। वैसे चावल ही खाने हैं तो खीर खाओ। राजनीतिक गलियारों में इस ट्वीट को लेकर भविष्य की राजनीति के कयास लगने शुरू हो गए हैं। जानकार मानने लगें कि जयंत का यह ट्वीट इशारा कर रहा है कि वे किस दिशा में जाने की तैयारी कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब जयंत महत्वाकांक्षी होने लगे हैं। उन्हें लगने लगा है कि जब राज्यसभा सांसद के रूप में सदन पहुंच ही गए हैं तो क्यों न अब मंत्री के रूप में सदन में प्रवेश किया जाए। ऐसे में जयंत ने आगामी लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिलाने की तैयारी लगभग कर ली है। चर्चाएं तेज हो गई हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में जयंत भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। पार्टी सूत्रों का यहां तक कहना है कि रालोद मुखिया जयंत चौधरी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात होने के बाद लगभग बात भी फाइनल हो चुकी है, सिर्फ अमित शाह ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी जयंत चौधरी मिल चुके हैं।

इससे पहले अपने निजी और पार्टी के फायदे के लिए जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी से 2022 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को गठबंधन में 33 सीटें दी थी। चुनाव संपन्न हुए और जब नतीजा आया तो राष्ट्रीय लोकदल को आठ विधानसभा सीटें जीतने में सफलता मिली। उसके बाद अखिलेश से तालमेल बिठाकर जयंत चौधरी स्वयं राज्यसभा सांसद बन गए। इसके बाद एक और सीट पर हुए उपचुनाव में भी राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार की जीत हुई तो कुल मिलाकर पार्टी के नौ विधायक हो गए और एक राज्यसभा सांसद, इस तरह जयंत को अखिलेश से गठबंधन का भरपूर फायदा हुआ।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह केंद्र में यूपीए और एनडीए की सरकारों का हिस्सा रहे थे। वीपी सिंह सरकार में भी मंत्री रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार और मनमोहन सिंह के साथ ही पीवी नरसिम्हा राव सरकार में भी उन्होंने मंत्री पद संभाला था। कृषि मंत्री से लेकर उड्डयन मंत्री तक की जिम्मेदारी अजीत सिंह को सरकारों ने सौंपी थी। केंद्र में मंत्री रहने से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल को मजबूती और पहचान मिली। हालांकि लगातार पता बदलने से चौधरी अजीत सिंह को नुकसान भी उठाना पड़ा था। खुद चुनाव हारे, पार्टी की भी दुर्दशा हो गई थी, लेकिन राजनीति में जब चौधरी अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी ने कदम रखा तो उन्होंने भी अपने पिता के नक्शे कदम पर ही चलने को अहमियत दी। अपने फायदे के लिए उन्होंने भी गठबंधन का सहारा लेना शुरू कर दिया और पहली बार में ही उन्हें इसका फायदा भी मिला।

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