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‘फोर डे वीक’ की राह पर जापान

वर्षों तक चलने वाली माथापच्ची, लंबे आंदोलन और बहुत सी व्यवस्थाएं बन जाने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि दफ्तर में सप्ताह में 48 घंटे काम करना उचित रहेगा। धीरे-धीरे फिर इन 48 घंटों को 6 दिनों में विभाजित कर दिया गया। यानी सप्ताह में सोमवार से शनिवार तक काम करिए यानी सोमवार से शनिवार तक रोज 8 घंटे काम करिए। फिर संडे को आराम फरमाइए हालांकि, आज भी दुनिया की एक बड़ी आबादी को इसकी सहूलियत नहीं है। लेकिन एक देश चार दिन काम करने वाली पद्धति को लागू करने की राह पर है।

जापानी इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज पैनासोनिक अपने कर्मचारियों को अप्रैल से सप्ताह में चार दिन काम करने का विकल्प देने जा रही हैं। सप्ताह में चार दिन कार्य करना ‘फोर वर्किंग डेज’ या ‘फोर डे वीक’ के रूप में जाना जाता है। भारत समेत दुनिया के कई देश और कंपनियां इसमें दिलचस्पी ले रही हैं।

जापान में कॉर्पोरेट नौकरियों में कड़ी मेहनत की संस्कृति चलती रही है। यहां अधिकतर कर्मचारी काम के बोझ तले दबे हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस एक लग्जरी की तरह है। हालांकि चीन और भारत के हालात भी बहुत अलग नहीं हैं, लेकिन जापान का हाल सरकार का सर्वे ही बताता है। 2020 में इस सर्वे में पाया गया कि देश में सिर्फ 8 फीसदी कंपनियां ही हैं, जो एक हफ्ते में दो या इससे ज्यादा फिक्स हॉलिडे दे रही हैं।

ऐसे में Panasonic और जापान की बड़ी फार्मा कंपनी Xianogi जैसी कंपनियों को हफ्ते में चार दिन काम करने का विकल्प देना अपने आप में क्रांतिकारी है। लेकिन यह क्रांतिकारी व्यवस्था और कहां चल रही है? हमारे देश में कब लागू होगी?

कुछ समय के लिए यह एहसास हुआ कि सप्ताह में केवल एक छुट्टी पर्याप्त नहीं है। सारा दिन कपड़े धोने, सब्जी खरीदने और बाकी काम निपटाने में बीत जाता है। आपको अपने लिए समय नहीं मिलता। एक और दिन की छुट्टी चाहिए। इसलिए दैनिक कामकाज का समय थोड़ा बढ़ा दिया गया। अब सोमवार से शुक्रवार तक साढ़े नौ घंटे काम करें। फिर दो दिन आराम करें।

अब आज जरूरत महसूस की जा रही है कि दो दिन भी काफी नहीं हैं। एक दिन वह अपना काम पूरा करें। दूसरे दिन परिवार के साथ घूमा जाए। रविवार की शाम के अंत तक कार्यालय के काम और ईमेल आदि में फिर से देरी हो जाती है। अपने लिए समय नहीं बचा है। इसलिए अब तीन दिन की छुट्टी चाहिए। ऐसे में अब योजना है कि दिन में 12 काम के घंटे और हफ्ते में तीन छुट्टियां होंगी।

जून 2020 में जब जापान में सरकार ने देखा कि लोगों का निजी और काम करने का जीवन काफी संकट में था, तो उसने कंपनियों से कहा कि ‘चार दिन का सप्ताह’ भी एक विकल्प रखा जाना चाहिए। अपने सिस्टम की जांच करें, अपने कर्मचारियों से बात करें और यदि संभव हो तो इसे लागू करें। कुछ कंपनियों ने लागू किया। कुछ ने नहीं किया।

इससे एक बात तो तय है कि फैसला लेना कंपनियों के हाथ में है। क्योंकि जिसकी कंपनी होगी, उसके नियम। अब अगर कोई कर्मचारी कंपनी से अपील करना चाहता है तो करें। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि इसे स्वीकार कर लिया जाएगा। अमेरिका, न्यूजीलैंड, जर्मनी, आयरलैंड और यूके जैसे कई देश हैं, जहां कुछ कंपनियों में ऐसा सिस्टम चल रहा है। लेकिन बिल्कुल नहीं।

कहां-कहां चल रहा ऐसा सिस्टम ?

कई देशों में कई कंपनियों में बोल्ट यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका के 45 देशों के 300 शहरों में परिचालन करने वाली कंपनी है। यह यूनिकॉर्न कंपनी कार रेंटल, माइक्रो-मोबिलिटी, कार शेयरिंग और फूड डिलीवरी जैसे कई काम करती है। सितंबर 2021 में इसने अपने 280 कर्मचारियों को शुक्रवार को भी छुट्टी लेना शुरू करने के लिए कहा।

कुछ दिनों के लिए कंपनी ने देखा की परिणाम कैसा मिल रहा है। फिर जनवरी 2022 से पूरी कंपनी में यही सिस्टम लागू किया गया। हां, कर्मचारियों के काम के घंटे भी बढ़े। बोल्ट के सीईओ कायन बर्स्ले ने कहा कि अभी तक बहुत अच्छे परिणाम मिले हैं। लोग नए सिरे से कार्यालय पहुंचते हैं, लगन से काम करते हैं और उत्पादकता में काफी वृद्धि हुई है।

अमेरिका में एलिफेंट वेंचर्स नाम की एक सॉफ्टवेयर और डेटा कंपनी ने अगस्त 2020 में इस प्रयोग की शुरुआत की थी। कंपनी को इसके नतीजे इतने पसंद आए कि वह इस सिस्टम में शिफ्ट हो गई। अब इसके कर्मचारी 10 घंटे काम करते हैं, फिर तीन दिन की छुट्टी। यूनिलीवर ने दिसंबर 2020 में न्यूजीलैंड में उसी दृष्टिकोण का पालन किया है।

आयरलैंड में सरकार ने ‘फोर डे वीक’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें कुछ कंपनियां फरवरी से 6 महीने तक यही सिस्टम लागू करेंगी, यह देखने के लिए कि यह किस तरह से प्रभावित हो रहा है। अगर यह फायदेमंद है, तो शायद इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए अब तक 20 कंपनियां सहमत हो चुकी हैं। अमेरिका और कनाडा में भी कुछ कंपनियां अप्रैल 2022 से इस तरह के कार्यक्रम शुरू कर रही हैं।

बेल्जियम में नेताओं ने इस महीने ‘फॉर डेज वीक’ शुरू करने के संकेत दिए हैं। स्पेन और स्कॉटलैंड की सरकारें भी इस तरह के ट्रायल के लिए मन बना रही हैं। दक्षिण कोरिया में मार्च में चुनाव होने हैं और सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ली जे मायुंग ने सत्ता में आने पर काम के घंटों में कटौती करने का वादा किया है। आइसलैंड में कुछ सर्वेक्षण किए गए, जहां यह पाया गया कि कुछ घंटों के काम को कम करने से लोगों के जीवन में सुधार हुआ है।

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