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जंतर-मंतर पर फिर लौटेगी लोकतंत्र की रौनक

नई दिल्ली। जंतर -मंतर पर लोकतांत्रिक ढंग से अपनी मांगों के लिए धरना- प्रर्दशन करने वाले संगठनों एवं आम लोगों में खुशी का माहौल है कि वे अब फिर से वोट क्लब एवं जंतर -मंतर पर  धरना- प्रदर्शन कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है इन दोनों स्थानों पर धरना-प्रर्दशन करने पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पिछले 5 अक्टूबर को इन दनों स्थानों पर धरना- प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।  न्यायमूर्ति ए . के . सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने एनटीटी के आदेश को पलट दिया है। पीठ ने कहा कि कहा कि नागरिकों के प्रदर्शन करने और शांत जीवन जीने के दोनों परस्पर विरोधी अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है।
केन्द्र को इस संबंध में दिशा – निर्देश तय करने का निर्देश देते हुए पीठ ने कहा , ” जंतर – मंतर और बोट क्लब (इंडिया गेट) जैसी जगहों पर प्रदर्शन करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता है।’ पीठ जंतर- मंतर और बोट क्लब पर होने वाले सभी प्रदर्शनों पर एनजीटी द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली यचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि पहले वोट क्लब में लोग अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाते थे। सन 1988 में महेन्द्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने यहां हजारों की संख्या में जमा होकर एक सप्ताह तक डेरा डाल दिया था। उस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद महसूस किया गया कि राजपथ पर संसद के एकदम नजदीक वोट क्लब पर धरना-प्रदर्शन या आंदोलन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके बाद 1993 में जंतर-मंतर को नया धरना-प्रदर्शन स्थल बनाया गया। सन् 1994 में जब उत्तराखंड राज्य आंदोलन चरम पर था तो उस वक्त जंतर-मंतर  ही आंदोलनकारियों की गतिविधियों का मुख्य केंद्र था।  देशभर के विभिन्न संगठन चाहे किसी भी विचार के हों, एक साथ यहां अपने-अपने टैंट लगाकर अपने-अपने तरीके से आवाज बुलंद करते थे। निर्भया बलात्कार कांड के खिलाफ जनता ने यहां से विरोध प्रकट किया था। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जन्म स्थली वास्तव में जंतर-मंतर ही है। अन्ना के ऐतिहासिक आंदोलन का यह साक्षी है। धरना-प्रदर्शनों के चलते यहां एक तरह से लोकतंत्र की रौनक बनी रहती थी। देश -विदेश से यहां आने वाले लगों को लगता था कि भारत में लोकतांत्रिक ढंग से लोगों को आंदोलन करने की आजादी है, लेकिन बाद में एनजीटी ने यहां भी धरना-प्रदर्शन पर यह कहकर रोक लगा दी कि इस प्रतिरोध के कारण आस-पास के निवासियों को परेशानी होती है। लिहाजा धरना-प्रदर्शन के लिए अजमेरीगेट पर नई जगह बनाई गई जिससे आंदोलनकारी दुखी थे। अब सर्वोच्च अदालत ने जो निर्देश दिये हैं उससे उनमें खुशी का माहौल है।

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