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मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 110 साल के बुजुर्ग कश्मीरी पंडित का किया अंतिम संस्कार

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां में गुरुवार 21 जुलाई को मानवता का जीता-जागता उदाहरण पेश किया। लॉकडाउन के बीच स्थानीय पड़ोसियों ने 110 साल के कश्मीरी पंडित को न सिर्फ श्मशान तक ले गए, बल्कि सभी रीति-रिवाजों से साथ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार भी किया।

खबरों के मुताबिक, शोपियां के जैनापुरा में कश्मीरी पंडित कंठ राम की मौत हो गई। जब ये बात मुस्लिम समुदाय के लोगों को मालूम हुआ तो वो आगे आए और पंडित कंठ राम के अंतिम संस्कार में परिवार की मदद की।

दरअसल, कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बुधवार से 6 दिन का लॉकडाउन लगाया गया है। इसी दौरान कंठ राम का स्वर्गवास हो गया। लॉकडाउन के बावजूद बड़ी संख्या में मुस्लिम लोग मृतक के घर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे।

अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार सुबह कंठ राम की मौत लंबी बीमारी की वजह से हो गई थी। उनके परिवार और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया।

कंठ राम को परिवार उन कश्मीरी पंडितों में से है जो 90 के दशक की शुरुआत में घाटी में हुए संघर्ष के बाद भी विस्थापित नहीं हुए। ये पहली बार नहीं है जब कश्मीरी मुसलमानों ने कश्मीरियत दिखाते हुए कश्मीरी पंडितों या अन्य दूरे धर्मों के लोगों के अंतिम संस्कार में मदद की है।

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा के कलोसा गांव में भी इससे पहले 4 जून को मुसलमानों ने एक कश्मीरी पंडित महिला के अंतिम संस्कार में मदद की थी। इसके अलावा मई के दूसरे हफ्ते में सेंट्रल कश्मीर के गांदरबल इलाके में लॉकडाउन के दौरान एक सिख व्यक्ति मौत हो गई। मुस्लिम लोगों ने उनका भी अंतिम संस्कार किया था। वहीं, दक्षिण कश्मीर के त्राल इलाके में 23 मई को एक बुजुर्ग कश्मीरी पंडित का पड़ोसी मुस्लिम परिवार ने अंतिम संस्कार किया था।

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