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केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंत्री बनने से पूर्व भारत के विदेश सचिव रह चुके थे। 1977 बैच के आईएफएस अधिकारी जयशंकर को पीएम मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्री बना यही संदेश देने का प्रयास किया था कि वे विदेश मंत्रालय को प्रोफेशनल नेतृत्व दे भारतीय विदेश नीति को चुस्त-दुरुस्त करना चाहते हैं। जयशंकर लेकिन बतौर विदेश मंत्री खास सफल नहीं नजर आने लगे हैं।

जानकारों की मानें तो तमाम प्रयासों के बावजूद एस ़ जयशंकर पेट्रोल के दामों में कमी करवा पाने में सफल न हो सके। उन्होंने ओपेक (तेल निर्यातक देशों का समूह) संग इस विषय पर कई बार वार्ता की। वे ईरान भी गए ताकि अमेरिकी
प्रतिबंधों को दरकिनार कर सस्ता तेल ईरान से खरीदने का रास्ता निकाला जा सके, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि एस ़ जयशंकर ने अपने अमेरिकी सम्पर्कों के जरिए भी खासा प्रयास किया कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में नरमी बनाई जा सके। रूस संग भी विदेश मंत्री स्तर पर सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर जयशंकर ने भरसक कोशिश की। लेकिन उनकी डिप्लोमेसी काम न करवा सकी। पेट्रोलियम मंत्री रहते धर्मेंद्र प्रधान भी जयशंकर के साथ मिलकर सस्ते तेल की खरीद का प्रयत्न करते नजर आए। दोनों ही विफल रहे।

हालांकि इस विफलता का खामियाजा प्रधान के हिस्से आया और मंत्रिमंडल विस्तार के समय उन्हें पेट्रोलियम से हटा शिक्षा मंत्रालय दे दिया गया। एस ़ जयशंकर को कोरोना वैक्सीन फ्रंट पर भी खास सफलता नहीं मिल पाई है। भारी भरकम जनसंख्या वाले देश की अपनी उत्पादन संख्या कम होने के चलते केंद्र सरकार ने कई विदेशी मुल्कों से कोरोना वैक्सीन आयात करने का प्रयास किया। स्वयं विदेश मंत्री इस बाबत बात करने अमेरिका गए। वे वहां फाइजर और माॅर्डना कंपनियों से भी मिले। दोनों ही कंपनियों की वैक्सीन लेकिन भारत आज तक नहीं पहुंच पाई हैं। इतना ही नहीं विगत कुछ समय से प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि भी बैकफुट पर है। ट्रम्प के बाद सत्ता में आए जो बायडन का मोदी के प्रति रुख खासा ठण्डा बताया जाता है। कोरोना संकट के दौरान केंद्र सरकार की नाकामियों को भले ही भारतीय मीडिया ने छिपाने का काम किया, विदेशों में जमकर मोदी सरकार को निशाने पर लिया गया। जानकारों का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी इन सबके चलते अपने विदेश मंत्री से अप्रसन्न हैं। बहुत संभव है कि जल्द ही भारत को नया विदेश मंत्री मिल जाए।

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