सौम्या  विश्वनाथन एक खोजी पत्रकार थीं।  सौम्या ने पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुत से धमाकेदार खुलासे किये थे। अपनी निडरता और ईमानदारी के साथ खोजी पत्रकार के नाम से प्रसिद्ध थीं। बहुत ही होनहार प्रडूसर थीं। क्राइम की खबरों पर रोजाना बारीकी से नजर रखती थीं। द.भारत की रहने वाली सौम्या ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आकर अपनी पत्रकारिता की शुरुवात की थी अपराध की खबरों में उन्हें महारत हासिल हुई। 30 सितम्बर 2008 को गुजरात की एक जगह और महाराष्ट्र के मालेगांव में, कुल मिलाकर तीन ब्लास्ट हुए थे।इसमें करीब दस लोगों के मरने की खबर थी।

ये ब्लास्ट एक के बाद एक हो रहे थे। इसके अलावा शाम होते -होते एक और खबर आयी कि अहमदाबाद में पुलिस को अलग -अलग जगहों से 17 जिन्दा बम मिले। पुलिस ने उन सारे बमों को डिफ्यूज कर दिया था। एक तरफ तो मालेगांव ,मुडासा में धमाकों की बौछार दस लोगों की मौत ऊपर से 17 बम।ऐसे में समाचार माध्यमों के लिए वह दिन निश्चित ही भागदौड़ वाला था। इसी चककर में सारे पत्रकार उलझे हुए थे। सभी अपने कामों में लगे हुए थे।इन्हीं खबरों को कवर करने के चक्कर में सौम्या को उस दिन बहुत देर हो गई। उस दिन वे दोपहर 3 से लेकर रात के 12 बजे तक व्यस्त रहीं थीं।

लगातार बम धमाकों के कारण सौम्या को रात 12 बजे के बजाय काम करते- करते सुबह के तीन बज गए। तो तीन बजे के आस -पास सौम्या अपने कार्यालय की चौथी मंजिल से लिफ्ट के द्वारा नीचे उतरती हैं और एक काफी लेती है। उसके बाद पार्किंग में जाती है। गाड़ी स्टार्ट करके पार्किंग से बाहर निकलती है। थोड़ी दूर चलते ही अपनी गाड़ी के सीसे साफ़ करने के लिए गाड़ी से निचे उतरती है। फिर गाड़ी में बैठ घर के लिए निकलती है। लेकिन कुछ दूर चलते ही एक डिवाइडर के पास सौम्या की कार टकराकर पलट जाती है। कुछ लोग देखते है और 100 नंबर परर कॉल करके पुलिस को बुलाते है। पुलिस वहां जाकर देखती है तो सौम्या के सिर से खून बह रहा था। उनको तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस को जानकारी के बाद पता चला कि यह एक पत्रकार है। उसके बाद पुलिस ने जांच -पड़ताल के बाद इसे एक सड़क दुर्घटना बताया। सभी लोग भी यही मान चुके थे कि यह एक सड़क दुर्घटना है।

 

कुछ समय बाद जब सौम्या के पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि उनके सिर से खून बह रहा था वो किसी चीज में टकराने की वजह से नहीं, बल्कि उनके सिर में एक गोली घुसी हुई थी। जैसे ही यह खबर आती है हर कोई हैरान हो जाता हैं। सब कहने लगते हैं कि अगर सिर में गोली है तो इसका मतलव यह एक मर्डर है। पुलिस भी फौरन इस केस में सारे एक्शन बदल देती है। उसके बाद इस मामले की जाँच होती है। सौम्या के दफ्तर की भी छानबीन होती है। सीसीटीवी फुटेज भी देखें जाते हैं। कॉल डिटेल भी निकाली जाती है। जो भी कोई मिलने वाला,किसी से दुश्मनी तो नहीं,कोई बॉयफ्रेंड तो नहीं हर तरीक़े से जाँच होती है लेकिन कुछ भी सुराग नहीं मिलता है।

उसके बाद एक दिन पुलिस रात में देखती है कि एक गाड़ी में चार- पांच लड़के घूम रहे थे। पुलिस ने उनको पकड़ लिया और बहुत सारी बातचीत करने के बाद उन बदमासों ने बताया की हम लूटपाट करते हैं। फिर उन्ही से पता चला कि उस दिन सौम्या जब घर को लौट रही थी तो वे ही उसका पीछा कर रहे थे। बदमासों ने बताया कि वसंत विहार में हमें धीमी चाल से कार चलाती एक अकेली लड़की नजर आयी। वह सौम्या ही थी। ड्राइवर की सीट पर बैठे रवि ने गाड़ी सौम्या की गाड़ी के पीछे लगा दी। उसने कई बार ओवरटेक कर सौम्या को रोकने की कोशिस की लेकिन नाकाम रहेँ।रवि ने गुस्से में आकर अपनी पिस्तौल निकालकर सौम्या पर फायर कर दिया।जोकि गाड़ी के सीसे में टकराकर सौम्या के सिर में जा लगी। उसके बाद आरोपियों ने उसका सामान लूटा और फरार हो गए।

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