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वैभव कृष्ण प्रकरण पर खुलकर सामने आई IPS की लड़ाई

गौतमबुद्ध नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण के कथित रूप से जारी हुए तीन अश्लील वीडियो के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की आईपीएस लाबी में खीचतान शुरू हो चुकी है। प्रदेश का एक वर्ग वैभव कृष्ण के साथ है तो दूसरा उनके विरोध में है। वैभव कृष्ण के विरोध में आई आईपीएस अधिकारियों की लाबी को अब डर इस बात का सता रहा है कि अगर इस मामले की सीबीआई जांच हुई तो बड़े से बड़ा अधिकारी नप सकता है। वैभव कृष्ण का आईपीएस अधिकारियों में विरोध इस बात को लेकर भी है कि जब उन्होंने पांच अधिकारियों के खिलाफ शासन को पत्र लिखा तो वह लीक किसने कराया?

वैभव कृष्ण मामले के तूल पकड़ने के साथ ही उनके तरफ से पांच अन्य आईपीएस अफसरों एसपी रामपुर अजय पाल शर्मा, एसएसपी गाजियाबाद सुधीर सिंह, पुलिस अधीक्षक बांदा गणेश साहा, एसपी कुशीनगर राजीव नारायण मिश्र, पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर हिमांशु के खिलाफ लिखे गए पत्र को लीक किया जाना भी ऊपर के अधिकारियों को रास नहीं आया है। दरअसल, प्रदेश में पहली बार एक आईपीएस अफसर कई अन्य अफसरों के लिए खुलकर आरोप लगा रहा है। इससे आईपीएस अफसरों के वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सभी के सामने आ गई है।

बहरहाल, सरकार किसी का पक्ष लेने के के मूड में नजर नही आ रही। जिसके चलते फौरी तौर पर शासन स्तर से सभी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद जांच में जो असलियत सामने आएगी उसके आधार पर कार्रवाई होगी। सूत्रों के मुताबिक पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद नाराज हैं। उन्होंने एडीजी रेंज मेरठ आलोक सिंह से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।

वहीं एसएसपी वैभव कृष्ण की तरफ से 5 आईपीएस अफसरों की भूमिका को लेकर शासन को भेजे गए पत्र की जानकारी न दिए जाने पर भी सीएम योगी ने नाराजगी जताई है। सूत्रों की अगर मानें तो जांच पूरी होने तक वैभव कृष्ण को उनके पद से हटाया जा सकता है। हालांकि, अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी के राजधानी से बाहर रहने के कारण अभी इसपर फैसला नहीं हो सका है।

ग़ौरतलब है कि तीन दिन पहले एसएसपी गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) वैभव कृष्ण का कथित अश्लील वीडियो वायरल हो गया था। बृहस्पतिवार को एसएसपी ने इस वीडियो को अपने खिलाफ साजिश बताते हुए गौतमबुद्ध नगर सेक्टर 20 थाने में एफआइआर भी दर्ज करा दी है । जबकि इस मामले में डीजीपी के निर्देश पर जांच हापुड़ के एसपी संजीव सुमन को सौंपी गई और इसके पर्यवेक्षण के लिए एडीजी रेंज मेरठ आलोक सिंह को जिम्मेदारी दी गई।

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