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रोचक हुआ राज्यसभा चुनाव

मीडिया इंडस्ट्री के सुभाष चंद्रा, व्यवसायी कार्तिकेय शर्मा और कुपेंद्र रेड्डी के राज्यसभा चुनाव के मैदान में आने से लड़ाई काफी रोचक हो गई है

देश में इन दिनों एक ओर मंदिर मस्जिद को लेकर राजनीति चरम पर है वहीं दूसरी तरफ 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों पर 10 जून को होने वाले चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। वहीं मीडिया इंडस्ट्री के सुभाष चंद्रा और व्यवसायी कार्तिकेय शर्मा ने राजस्थान और हरियाणा से तो कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) के नेता कुपेंद्र रेड्डी ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। इन नामों के मैदान में आने से राज्यसभा की लड़ाई काफी रोचक हो गई है।

कहा जा रहा है कि कुपेंद्र रेड्डी, सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा के नामांकन के परिणाम स्वरूप तीनों राज्यों में उनके और कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर हो सकती है, बशर्ते इनमें से कोई भी उम्मीदवार अंतिम दिन यानी 3 जून तक अपना नामांकन वापस न ले। यदि कोई भी उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है तो तीन राज्यों राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में भी चुनाव होना तय है। कुल मिलाकर, चुनाव आयोग ने 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी। 11 राज्यों में कोई मुकाबला नहीं होगा क्योंकि मैदान में उतने ही उम्मीदवार हैं जितनी की वहां से राज्यसभा की सीटें खाली हैं। यानी इनका निर्विरोध चुना जाना तय है।

महाराष्ट्र से महत्वपूर्ण उम्मीदवारों में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कर्नाटक से पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, संजय राउत एवं प्रफुल्ल पटेल मैदान में हैं। इन सभी के राज्य विधानसभाओं में अपने-अपने दलों की ताकत के आधार पर जीतने की संभावना बताई जा रही है।

सुभाष चंद्रा के आने से कड़ा हुआ मुकाबला

राजस्थान में मुकाबला तीसरे कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद तिवारी और सुभाष चंद्रा के बीच होगा। अन्य दो कांग्रेस उम्मीदवार मुकुल वासनिक और रणदीप सिंह सुरजेवाला हैं। राजस्थान में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए। कांग्रेस 108 विधायकों के साथ दो सीटें जीत सकती है और भाजपा की 71 के साथ एक पर जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। चंद्रा को जिताने के लिए भाजपा को 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है और 21 निर्दलीय व छोटे दलों के विधायक मिलकर चौथे विजेता का फैसला करेंगे।

हरियाणा में भी फंस सकती है कांग्रेस

हरियाणा में कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन के पास सिर्फ एक अतिरिक्त वोट है। उन्हें जीतने के लिए 30 वोटों की आवश्यकता है और किसी भी दलबदल या वोटों के रिजेक्शन का मतलब पूर्व कांग्रेस नेता विनोद शर्मा के बेटे कार्तिकेय शर्मा की जीत हो सकती है तो एक भाजपा प्रत्याशी की जीत निश्चित मानी जा रही है, वह हैं कृष्ण लाल पंवार। हरियाणा विधानसभा में 41 विधायकों वाली भाजपा को अपने गठबंधन सहयोगी जननायक जनता पार्टी का भी समर्थन प्राप्त है, जिसके 10 विधायक हैं। जजपा पहले ही कार्तिकेय शर्मा को समर्थन दे चुकी है। सात निर्दलीय हैं जिनसे उम्मीद की जा रही है कि वे उसी तरह से वोट देंगे जिस तरह से भाजपा चाहेगी। अकेले इनेलो विधायक अभय चौटाला और एचएलपी विधायक गोपाल कांडा के भी शर्मा की उम्मीदवारी का समर्थन करने की उम्मीद है। बीजेपी को अपने अतिरिक्त वोट शर्मा को ट्रांसफर करने की उम्मीद है।

जनता दल बिगाड़ सकती कांग्रेस का खेल

कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) ने कुपेंद्र रेड्डी के राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में नामांकन के साथ चुनाव में एक दिलचस्प मोड़ ले लिया। इससे कहा जा रहा है कि बीजेपी दो और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है। ऐसे में चौथी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मंसूर अली खान, भाजपा के लहर सिंह और रेड्डी के बीच मुकाबला है। पार्टी नेताओं ने कहा कि जद (एस), जिसके 30 विधायक हैं, उसे अपना उम्मीदवार चुने जाने के लिए 15 और वोटों की जरूरत है। कांग्रेस के पास 20 और बीजेपी के पास 31 वोट ज्यादा हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जद (एस) को उनके उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए क्योंकि पार्टी ने पिछले राज्यसभा चुनाव में जेडी (एस) के उम्मीदवार पार्टी सुप्रीमो एचडी देवेगौड़ा का समर्थन किया था। उन्होंने कहा ‘जद (एस) चाहता है कि कांग्रेस अपने दूसरे उम्मीदवार को वापस ले और रेड्डी का समर्थन करे। जद (एस) के प्रदेश अध्यक्ष सीएम इब्राहिम ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुडी कुमारस्वामी राज्यसभा चुनाव के मुद्दे को सुलझाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात करेंगे।

महाराष्ट्र में भाजपा ने बढ़ाया सस्पेंस

भाजपा के महाराष्ट्र में तीसरे उम्मीदवार को उतारने के साथ, राज्यसभा की छह सीटों के लिए होने वाले चुनावों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। इसका खास कारण यह है कि न तो सत्तारूढ़ महाराष्ट्र विकास अघाड़ी और न ही विपक्षी भाजपा के पास अपने दम पर छठे उम्मीदवार का चुनाव करने के लिए आवश्यक संख्या है, इसलिए 29 विधायक, जो या तो निर्दलीय हैं या छोटे दलों के हैं जो परिणाम तय करेंगे। राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा छह सदस्यों का चयन करेगी और एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 42 मतों की आवश्यकता होगी। एमवीए गठबंधन को तीन और भाजपा के दो सांसद निर्वाचित हो सकते हैं। छठी सीट पर शिवसेना के संजय पवार और भाजपा के धनंजय महादिक के बीच मुकाबला है। अन्य उम्मीदवार शिवसेना के संजय राउत, राकांपा के प्रफुल्ल पटेल, कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी और भाजपा के पीयूष गोयल और अनिल बोंडे हैं। गोयल और बोंडे के चुने जाने के बाद बीजेपी के पास 22 अतिरिक्त वोट होंगे। पार्टी का दावा है कि उसे छोटे दलों और निर्दलीय के सात विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उसे अभी भी 13 वोटों की जरूरत होगी।

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