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संवेदनहीन सरकार: मंत्री करते रहे समीक्षा, महिला ने इलाज के इंतजार में तोड़ा दम

पिछले कोरोना काल के मुकाबले इस साल की महामारी में उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनहीनता ज्यादा उजागर हो रही है । कई जगह देखने को मिल रहा है कि प्रदेश में हो रही मौतों को श्मशान घाट तक ना ले जाकर गंगा और आसपास की नदियों में बाहर जा रहा है। जबकि इसका ठीकरा बिहार सरकार के सर फोडा जा रहा है। कहा जा रहा है कि वह अपने प्रदेश के शवों को उत्तर प्रदेश में बहा रहे हैं।
हालांकि यह चिंता के साथ ही जांच का विषय भी है।

दूसरी तरफ प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भी हैं जो मरीजों की मौत का कारण बन रहे हैं। ऐसा ही एक मामला मेरठ में सामने आया है । जहां कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा डॉक्टरों की समीक्षा बैठक में इस कदर मशगूल रहे कि मरीजों की जान आफत में आ गई । करीब 2 घंटे तक मंत्री ने डॉक्टरों को अपनी समीक्षा बैठक में बिजी रखा । इस दौरान मरीज हॉस्पिटलों के बाहर इलाज के लिए तड़पते देखे गए। इस दौरान एक मरीज की इलाज के अभाव में मौत हो गई। क्योंकि सभी डॉक्टर मंत्री जी की मीटिंग में सफाई पेश करने में जो लगे थे ।

मामला मेरठ के मेडिकल कॉलेज का है। जहा लिसाड़ीगेट क्षेत्र के श्याम नगर की हुस्नआरा (48) को सांस लेने की दिक्कत थी। काफी जद्दोजहद के बाद जब एंबुलेंस नहीं मिली। महिला की सांसें जवाब देने लगी थीं। ऑक्सीजन का लेवल 50 पर था। एक प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए तो उसने सलाह दी कि इन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाओ।

परिवार के लोग ई-रिक्शा में ही महिला को मेडिकल कॉलेज में गए। लेकिन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में डॉक्टरों ने यह कहकर महिला को भर्ती नहीं किया कि यहां बेड खाली नहीं है और मेडिकल इमरजेंसी फुल हो चुकी है।

परिवार के लोग मिन्नतें करते रहे कि किसी भी तरह महिला को भर्ती कर लो। मेडिकल कॉलेज में उस समय न तो प्राचार्य थे और न ही अन्य वरिष्ठ डॉक्टर। क्योंकि प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा  स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे।

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