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महंगाई – बेरोजगारी को चुनावी मुद्दा बना पाने में नाकाम विपक्ष

 देश में इन दिनों पांच राज्यों के प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों में दलबदल और आरोप – प्रत्यारोप  की राजनीति चरम पर है, वहीं आम जनता के मुद्दों को लेकर विपक्षी पार्टियां पूरी तरह विफल होती दिख रही हैं। महंगाई और बेरोजगारी ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे सीधे तौर पर जनता प्रभावित है। लेकिन  सत्तापक्ष इन मुद्दों से ध्यान भटकाने में कामयाब होता दिख रहा है, जबकि विपक्ष इन्हें प्रमुख चुनावी मुद्दा बना पाने में नाकाम नजर आ रहा है। इन मुद्दों का चुनावों पर कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर राजनीतिक  विशेषज्ञ आश्वस्त नहीं हैं। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं व युवाओं पर इन मुद्दों का असर हो सकता है।

 

दरअसल ,कुछ ही दिनों में उत्तर प्रदेश,उत्तराखण्ड , पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया चरम पर है। ज्यादातर राज्यों में राजनीतिक दल जीत के बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। मुफ्त में चीजें देने की बात भी कही जा रही है। लेकिन महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों का ठोस समाधान निकालने की बात न सत्तापक्ष कर रहा है और न विपक्ष। विपक्षी दल इन मुद्दों को सरकार के खिलाफ उठाने की कोशिश जरूर कर रहे हैं, लेकिन वह अब तक इन मुद्दों पर चुनाव को केंद्रित नहीं करा पा रहे हैं।

बेरोजगारी को लेकर दिसंबर के आंकड़ों को देखें तो गोवा और पंजाब में बेरोजगारी की समस्या सबसे बड़ी है। गोवा में यह दर 12 और पंजाब में 7 फीसदी के करीब है। जबकि, उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में यह पांच फीसदी है। हाल में चुनावी सर्वे करने वाली एजेंसियों के सर्वेक्षण भी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में ये दो मुद्दे असर डालेंगे। पंजाब में एक राजनीतिक दल ने अपने आंतरिक सर्वे में पाया कि महंगाई के मुद्दे का असर सबसे ज्यादा है और बेरोजगारी दूसरे नंबर पर है। इसी तरह के सर्वेक्षण गोवा और उत्तराखण्ड को लेकर भी सामने आए हैं।

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