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मेडिकल स्टाफ को PPE किट से इंफेक्शन, 1 जून से धरने पर AIIMS नर्स यूनियन

मेडिकल स्टाफ को PPE किट से इंफेक्शन, 1 जून से धरने पर AIIMS नर्स यूनियन

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में नर्स यूनियन का प्रदर्शन लगातार जारी है। एम्स में अब तक 47 नर्सों समेत 329 से ज्यादा कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इसलिए नर्स यूनियन के सदस्य 1 जून से धरने पर बैठे हैं। यूनियन की मांग है कि पीपीई किट के साथ काम करने के घंटों को चार घंटे तक सीमित किया जाए। उनका कहना है कि डॉक्टर हो या नर्स या फिर दूसरे सुरक्षाकर्मी उन्हें आठ घंटे की ड्यूटी करनी होती है। जिसमें लगातार आठ घंटे तक पीपीई किट पहनकर रहना पड़ता है। उस आठ घंटे के दौरान उन्हें वाशरूम जाने या कुछ भी खाने की अनुमति नहीं होती। यहां तक कि वे पानी भी नहीं पी सकते। पीपीई किट लगातार आठ घंटे तक पहने रहने के कारण उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।

एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया को नर्स यूनियन ने पत्र लिखा है जिसमें अस्पताल के कोविड-19 क्षेत्रों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई) के साथ चार घंटे की समान पाली, कोविड-19 और गैर कोविड-19 क्षेत्रों के बीच समान रोटेशन नीति लागू करने समेत कई मांगें रखी हैं। वहीं एम्स नर्स यूनियन का कहना है कि यह विरोध तब तक जारी रखा जाएगा जब तक कि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान न दे।

यूनियन के अध्यक्ष हरीश काजला ने बताया कि छह घंटे और अक्सर 7 से 8 घंटे काम करना पड़ता है। व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) पहनने और उतारने से खासकर महिला कर्मियों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ”हमारे कई कर्मचारी शरीर पर चकत्ते और मूत्राशय में संक्रमण जैसी स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना कर रहे हैं, जबकि कई अन्य का वजन कम हुआ है।”

काजला ने कहा, ”महिलाओं को मासिक धर्म से संबंधित समस्याएं हो रही हैं क्योंकि वे पीपीई के साथ सेनेटरी पैड नहीं बदल सकती हैं, न ही वॉशरूम जा सकती हैं। एक बार जब आप पीपीई पहन लेते हैं तो इसे उतारना मुश्किल होता है। ऐसे में हमें ड्यूटी पर वयस्क डायपर पहनने पड़ते हैं, जोकि बहुत असहज होते हैं। स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की वजह से हमें तेजी से संक्रमण की चपेट में आने का खतरा होता है।”

बता दें एम्स में एक फरवरी से अब तक फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सों समेत 329 कर्मी कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से तीन की मौत हो चुकी है। इसपर एम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. डीके शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी फरवरी से कोरोना पीड़ितों के संपर्क में रहे हैं। इनमें से कई कोराना की चपेट में आ चुके थे। इनमें से कई ठीक होने के बाद ड्यूटी भी जॉइन कर चुके हैं। कोरोना की चपेट में आकर एक इलेक्ट्रिशियन की बीते रविवार को मौत हो गई, जबकि एक सैनिटेशन सुपरवाइजर और एक मेस वर्कर की बीते सप्ताह मौत हो चुकी है।

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