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पिछले साल भारत में मिला कोरोना वायरस का स्वरूप को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बात की चेतावनी दी है कि सबसे पहले भारत में पहचाने गए कोरोना वायरस के बी.1.617 स्वरूप अब अब पूरे विश्व के लिए चिंताजनक और बेहद घातक है। जो अब तक दुनिया के 44 देशों तक पहुंच चुका है। भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ने के मामलों के पीछे B.1.617 वैरिएंट है। यह पहली बार अक्टूबर 2020 में भारत में पाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठ ने कहा कि भारत के अलावा ब्रिटेन में इस वैरिएंट के सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं।
भारत में मार्च से ही संक्रमण के मामले बढ़ने लगे, लेकिन इस पर गंभीरता पूर्वक ध्यान नहीं दिया गया। बता दें कि इससे पहले अमेरिका के मशहूर विषाणु रोग विशेषज्ञ डॉ फौसी ने भी अगाह किया था कि अगर समय रहते भारत में कोरोना पर ध्यान दिया जाता तो ऐसी भयावह स्थिति देखने को नहीं मिलती। डब्ल्यूएचओ लगातार यह आकलन करता है कि स्थानांतरण और गंभीरता के लिहाज से सार्स सीओवी-2 (कोरोना वायरस) के स्वरूपों में क्या बदलाव आए हैं या इस कारण सरकारों द्वारा लागू जन स्वास्थ्य व सामाजिक मानकों में बदलाव की क्या आवश्यकता है।
वैश्विक स्वास्थ्य संस्था ने दो दिन पहले साप्ताहिक महामारी विज्ञान रिपोर्ट पेश की है। जिसमें बताया गया है कि जीआईएसएड की तरफ से बीते 11 मई तक कोविड वायरस के 4,500 क्रम अपलोड किए गए हैं और इनमें बी.1.617 स्वरूप की उपस्थिति 44 देशों के लोगों के सैंपल में मिली है। सबसे चिंताजनक बात है कि यह 44 देश डब्ल्यूएचओ के सभी 6 क्षेत्र में से आते हैं यानी वायरस का यह भारतीय स्वरूप विश्व के सभी कोनों तक पहुंच चुका है।
बता दें कि जीआईएसएड एक वैश्विक वैज्ञानिक पहल और कोविड-19 महामारी के लिए जिम्मेदार नॉवल कोरोनावायरस के जीनोम डाटा तक सभी को खुली पहुंच उपलब्ध कराने वाला प्राथमिक सोर्स है। जीआईएसएड के डाटा के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने बी.1.617 को चिंताजनक स्वरूप (वीओसी) घोषित किया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि बी.1.617 में संक्रमण फैलने की दर अधिक है। वैश्विक संस्था के मुताबिक, प्रारंभिक सबूत से पता चला है कि इस स्वरूप में कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ‘बामलैनिविमैब’ की प्रभाव-क्षमता घट जाती है।
इससे इलाज के बावजूद मरने वालों की दर बढ़ जाती है। कोविड-19 का बी.1.617 स्वरूप सबसे पहले भारत में अक्तूबर 2020 में देखा गया था । भारत में कोविड-19 के बढ़ते मामलों और मौतों ने इस स्वरूप की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरस के मूल रूप से कहीं अधिक खतरनाक प्रभाव वाले स्वरूप को चिंताजनक माना जाता है। इससे पहले कोरोना वायरस का मूल स्वरूप पहली बार 2019 के अंतिम महीनों में चीन में देखा गया था। किसी भी स्वरूप से पैदा होने वाले खतरे में संक्रमण फैलने की अधिक आशंका ज्यादा घातक और टीकों का प्रभाव कम होता है।

