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अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की गिरती साख

अमेरिका की ‘2020 कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रेक्टिसेस’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सरकार को लेकर आलोचनात्मक खबरें लिखने वाले मीडिया पर सरकार या इसके नुमाइंदों द्वारा दबाव डाला जा रहा है इस रिपोर्ट मैं भारत में मानवाधिकारों से संबंधित कई अहम मुद्दों का जिर्क  हैं,|  जिनमें गैर-कानूनी हत्याएं, अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर पाबंदी, भ्रष्टाचार और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की सहनशीलता शामिल है अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियां लगातार भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर इन दिनों गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं। पिछले दिनों स्वीडन के वी डेम इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में भारत को ‘चुनावी तानाशाही’ की श्रेणी में रखा गया था। इस रिपोर्ट के सामने आते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ‘भारत अब लोकतांत्रिक देश नहीं रहा।’
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद उठा सवाल अभी थमा भी नहीं कि एक अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ने वर्तमान मोदी सरकार की मंशा पर प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए अपनी एक रिपोर्ट जारी कर दी है। .ये  कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रेक्टिसेस’ 25 बातों के आधार पर Global Freedom Index बनाता है,  जिनमें राजनीतिक स्वतंत्रता, नागरिकों के मौलिक अधिकार, स्वतंत्र मीडिया, विरोध प्रदर्शन का अधिकार, विदेशी एनजीओ को काम करने की आज़ादी और स्वतंत्र चुनाव का मुद्दा शामिल है.   इस रिपोर्ट के मुताबिक, 210 देशों के Global Freedom Index में भारत पांच स्थान नीचे आया है और अब उसकी रैंक 83 से 88 हो गई है. भारत को राजनीतिक अधिकारों की स्वतंत्रता के लिए इस एनजीओ ने 40 में से 34 अंक दिए हैं और नागरिकों के स्वतंत्र अधिकारों के मामले में 60 मे से 33 अंक दिए हैं.

इस रिपोर्ट मैं भारत के संबंध में लिखे गए कुल  68 पेज में कहाँ गया है कि गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार द्वारा की जा रहीं कोशिशों के बावजूद सत्ता के सभी स्तर पर आधिकारिक दुराचार को लेकर गैर-जवाबदेही है.

प्रेस फ्रीडम को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि आम तौर पर भारत सरकार ने इसकी जरूरत का समर्थन किया है, लेकिन ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सरकार या सरकार के करीबी लोगों ने ऑनलाइन ट्रोलिंग समेत विभिन्न तरीकों से आलोचनात्मक खबरें लिखने वाली मीडिया को दबाने की कोशिश की है.

केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडिया की आवाज को दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, मानहानि, राजद्रोह, हेट स्पीच कानून के साथ-साथ अदालत की अवमानना जैसे कानूनों का सहारा लिया है.  रिपोर्ट में कुछ समाचार पोर्टल व पत्रकारों के नामो का भी  जिक्र हैं द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ,गुजराती समाचार पोर्टल ‘फेस ऑफ द नेशन’ के संपादक धवल पटेल, स्क्रॉल.इन की कार्यकारी संपादक सुप्रिया शर्मा व् दिल्ली  दंगे को लेकर रिपोर्टिंग कर रहे कारवां  पत्रिका के तीन पत्रकारों पर हुए हमले का भी विवरण दिया गया है इस रिपोर्ट में बताया गया  हैं की कैसे पत्रकारों पर सरकार के खिलाफ लिखने पर पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज की गयी हैं |

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी इस  रिपोर्ट में भारत में एक दर्जन से अधिक मानवाधिकारों से जुड़े अहम मुद्दों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें पुलिस द्वारा गैर न्यायिक हत्याओं समेत अवैध कत्ल, कुछ पुलिस और जेल अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित करना, क्रूरता, अमानवीयता या अपमानजनक व्यवहार या सजा के मामले, सरकारी अधिकारियों द्वारा मनमानी गिरफ्तारियां और कुछ राज्यों में राजनीतिक कैदी प्रमुख हैं.
भारत ने इस रिपोर्ट को ‘भ्रामक, गलत और अनुचित’ करार दिया था.

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