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भारत को क्लाइमेट चेंज से हुआ करोड़ों रुपये का नुकसान

भारत

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वर्ष 2020 के लिए वैश्विक जलवायु परिवर्तन की समीक्षा करते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़े हुए स्तर और दुनिया पर उनके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह रिपोर्ट एशिया में हुए जलवायु परिवर्तन में हुए बदलाव का उल्लेख करती है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण एशियाई देश प्राकृतिक आपदाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, चीन और भारत वैश्विक जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। विभिन्न प्रकार के चक्रवात, भारी वर्षा, बाढ़, सूखा इससे फसलों के साथ-साथ संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा, कई लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक भारत को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, भारत 2020 में अनुमानित लगभग 65. 5 लाख करोड़ रुपये की चपेट में आ जाएगा। चीन को सबसे बड़ा झटका करीब 238 अरब डॉलर का लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक जापान को 83 अरब, दक्षिण कोरिया को 24 अरब, पाकिस्तान को 15 अरब, थाईलैंड को 12 अरब और बांग्लादेश को 111 अरब का नुकसान हुआ।

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) ने कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग ने दुनिया में प्राकृतिक आपदाएं पैदा की हैं, खासकर एशिया में। यह ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा के कारण है। कोरोना के चलते 2020 में दुनिया भर में तालाबंदी हुई, इसके बावजूद ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि हुई है। नतीजतन, वर्ष 2020 को पिछले 40 वर्षों में उच्चतम औसत तापमान वाले वर्ष के रूप में पहचाना गया है।

‘वैश्विक जलवायु परिवर्तन’ पर संयुक्त राष्ट्र का एक प्रमुख सम्मेलन अगले सप्ताह स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहा है। सम्मेलन वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें जलवायु परिवर्तन के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए जाने की संभावना है। सम्मेलन से ठीक एक हफ्ते पहले विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपनी 2020 की रिपोर्ट जारी की है।

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