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भारत ‘हिन्दू वृद्धि दर’ के बेहद करीब पहुंच चुका है : रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ यानी भारत में हिंदू विकास दर को लेकर एक अहम चेतावनी दी है। रघुराम राजन ने कहा है कि निजी क्षेत्र में कमजोर निवेश, ऊंची ब्याज दर, धीमी आर्थिक विकास दर के कारण भारत हिंदू विकास दर के करीब आ गया है। रघुराम राजन के हिंदू विकास दर के बयान ने हिंदू विकास दर क्या है, इस बारे में चर्चा शुरू कर दी है।

विकास की हिंदू दर क्या है?

विकास की हिंदू दर अर्थशास्त्र में एक सिद्धांत है। यह किसी धर्म से संबंधित नहीं है। लेकिन इस शब्द का व्यापक रूप से वित्तीय मंचों में उपयोग किया जाता है। 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद अधिकांश नागरिक कृषि पर निर्भर थे। तब समाज में बहुत गरीबी थी। इंफ्रास्ट्रक्चर केवल रेलवे था। सड़कों का अभाव था।
लेकिन आगे क्या हुआ कि धीरे-धीरे ये सारी चीजें बनने लगीं। उसके बाद, स्वतंत्रता के 30 वर्ष पूरे होने तक विकास दर काफी धीमी हो गई। इस धीमी विकास दर की बात करते हुए 1978 में हिंदू ग्रोथ रेट का जिक्र किया गया था। यह उल्लेख प्रोफेसर राज कृष्ण ने किया था जो उस समय प्रसिद्ध थे। 1978 में राज कृष्ण के नाम लेने के बाद अर्थशास्त्रियों ने नाम लेना शुरू किया। 1947 में देश को आजादी मिली। उस समय हमारा देश आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ था। विकास दर 30 वर्षों के लिए समान थी। यह वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत या उससे कम थी। इसलिए हिंदू विकास दर शब्द प्रयोग में आया।
1991 में आर्थिक सुधारों और उदारीकरण की शुरुआत के बाद धीमी ‘हिंदू विकास दर’ को पीछे छोड़ते हुए देश की विकास दर तेजी से बढ़ी। विशेषकर 2003 से 2008 की अवधि में देश की विकास दर औसतन 9 प्रतिशत रही।

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