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डेमोक्रेट अमेरिका संग बढ़ती भारत की दूरी

अमेरिका ने भारत पर कार्रवाई करते हुए भारत को करेंसी मैनिपुलेटर्स की निगरानी सूची में डाल दिया है। करेंसी मैनिपुलेटर्स यानी मुद्रा के साथ छेड़छाड़ करने वाले। 20 अप्रैल को भारत सरकार ने इसका जवाब दिया और कहा कि इसका कोई तर्क समझ नहीं आता है।

भारत ने अमेरिका के वित्त विभाग की तरफ देश को मुद्रा व्यवहार में छेड़छाड़ करने वालों की मॉनिटरिंग लिस्ट में डालने के आधार को खारिज कर दिया है। भारत ने कहा कि विदेशी मुद्रा विनियम बाजार में केंद्रीय बैंक की गतिविधियां संतुलित है, और विदेशी मुद्रा भंडार का सग्रह नहीं कर रहा।

भारतीय वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने मीडिया को बताया कि “मैं इसका कोई आर्थिक तर्क नहीं समझ पाया”। पिछले सप्ताह अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने भारत के अलावा करेंसी मैनिपुलेटर्स की सूची में चीन, ताइवान,दक्षिणकोरिया, जर्मनी, इटली सिंगापुर को भी डाला था। वियतनाम और स्विजरलैंड को पहले ही करेंसी मैनिपुलेटर्स की सूची में डाल रखा है।

अनूप वधावन ने आगे कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक एक ऐसी नीति का पालन कर रहा है जो बाजार की ताकतों के आधार पर मुद्रा के आदान-प्रदान की अनुमति देता है।

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मैनिपुलेटर्स की सूची में डाले जाने के बाद भारत की करेंसी पर नजर रखी जाएगी। वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 2020-21 में लगभग पांच बिलियन बढ़ गया था, जो 5 मार्च को समाप्त हो गया।

पिछले साल भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 24 बिलियन डॉलर का रहा। कोरोना महामारी के बाद अमेरिका ने सोमवार को दूसरी बार भारत को निगरानी सूची में डाल दिया है। केंद्रीय बैंक द्दारा डालर की खऱीद जीडीपी के पांच प्रतिशत से अधिक रहने को वजह बताया गया है।

अमेरिकी वित्त् विभाग की तरफ से कहा गया है कि यह सीमा दो प्रतिशत रहनी चाहिए। अमेरिका उन देशों को इस सूची में शामिल करता रहा है जो जानबूझकर अनुचित मुद्रा व्यवहार को अपनाते हुए डॉलर के मुक़ाबले अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करते हैं। जब एक वित्त वर्ष में व्यापार का अधिवेश महत्वपूर्ण तरीके से बढ़ना और देश की कुल जीडीपी का विदेशी मुद्रा भंडार की खऱीद करने होने लगे तो अमेरिका यह कदम उठाता है।

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