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आगामी आम चुनाव में देश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा के खिलाफ बनाए गए विपक्षी गठबंधन इंडिया की चौथी बैठक में एक ओर जहां कई सहयोगी दल नाराज नजर आए वहीं सीट शेयरिंग को लेकर जो उलझन चल रही है उसे सुलझाया नहीं जा सका है। हालांकि विपक्षी गठबंधन का एक गुट का दावा है कि इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक में वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा, वहीं दूसरे गुट का कहना है कि एक बड़ा वर्ग सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने को लेकर संशय में है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में, जहां देश में सबसे अधिक 80 लोकसभा सीटें हैं।

यूपी में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के बीच सीटों का बंटवारा होना है। सपा सबसे प्रमुख पार्टी है। बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी मौजूद थे। पिछले कई महीनों से यूपी में कांग्रेस, सपा और आरएलडी के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं। कांग्रेस ने हाल के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में उसके साथ सीटें साझा करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सपा ने नाराजगी व्यक्त की थी। उसने चेतावनी दी थी कि देश की सबसे पुरानी पार्टी को यूपी में जैसे को तैसा वाला व्यवहार का सामना करना पड़ेगा। आरएलडी तब भी नाखुश थी जब उसे राजस्थान चुनाव में कांग्रेस द्वारा सिर्फ एक सीट दी गई थी। यह और बात है कि दोनों राज्यों में कांग्रेस को चुनावी हार का सामना करना पड़ा। इस साल की शुरुआत में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर सपा और आरएलडी के बीच भी कुछ तनाव हुआ था। आरएलडी ने तब सपा पर धमकाने और पर्याप्त सीटें न देने का आरोप लगाया था।

अजय राय की अध्यक्षता वाली यूपी कांग्रेस, पार्टी के पुनरुद्धार के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन लड़ाई अभी भी मुख्य रूप से भाजपा और राज्य में प्रमुख विपक्षी सपा के बीच है। यूपी के कई कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि पार्टी 20-25 सीटों पर अपना दावा करेगी। 2009 के लोकसभा चुनाव में उसने 21 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पार्टी कम से कम उन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहेगी जो उसने 2009 में जीती थीं। हाल ही में एक बैठक के दौरान भी यह निर्णय लिया गया था कि कांग्रेस को राज्य में कम से कम 20 सीटें मिलनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने यह बताने से परहेज किया कि पार्टी कितनी सीटें चाहेगी। उन्होंने कहा ‘हम सभी 80 सीटों पर अपना संगठन तैयार कर रहे हैं। क्योंकि अगर हम अपने सहयोगी दल को एक सीट दे भी दें तो भी हमें वहां एक मजबूत संगठन की जरूरत होगी। सीट बंटवारे का फैसला पार्टी का दिल्ली नेतृत्व करेगा।’ दूसरी तरफ सपा लोकसभा चुनाव में 50-60 सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही है। पार्टी सूत्रों की मानें तो अंतिम फैसला अखिलेश यादव करेंगे, लेकिन सपा राज्य में कम से कम 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी ।

गौरतलब है कि यूपी को लेकर इंडिया गठबंधन की किसी भी पार्टी ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह टिप्पणी नहीं की है कि वह तीनों सहयोगियों के बीच कितनी सीटें सुरक्षित करना चाहती है। लेकिन जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली आरएलडी पश्चिमी यूपी में लगभग 12 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, जहां उसका जाटों और गुर्जरों के बीच समर्थन आधार है। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव कुलदीप उज्ज्वल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘गठबंधन को बरकरार रखने के लिए हम सभी को बड़ा दिल दिखाना होगा। इसके लिए हमारे सहयोगियों को मिलनसार होना होगा।’

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