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भारत बंद: विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन 

इससे पहले पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम के ख़िलाफ़ विपक्ष के भारत बंद के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी कांग्रेस के 70 सालों में विकास न होने की बात करते हैं. लेकिन असलियत यह है कि पिछले 70 साल में रुपया इतना कमज़ोर नहीं रहा जितना मोदी शासन के चार सालों में हो गया है. पेट्रोल 80 रुपये के पार चला गया है और डीज़ल 80 से थोड़ा ही कम है, लेकिन नरेंद्र मोदी पूरा देश घूमते हैं पर इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहते.
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में केवल 15-20 क्रोनी कैपिटलिस्ट को रास्ता नज़र आता है, आम लोगों को नहीं क्योंकि सरकार की नज़र केवल उन्हीम 15-20 लोगों पर है. भाषण के आखिर में उन्होंने कहा कि ‘सभी विपक्षी दल एक साथ बैठे हैं ये ख़ुशी की बात है. हम एक साथ मिलकर बीजेपी को हराने जा रहे हैं.’
पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों के विरोध में कांग्रेस ने भारत बंद की कॉल दी थी. उसका कई राज्यों में असर दिखाई दिया. इस बंद में कांग्रेस के साथ करीब 20 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के राजघाट से बंद की शुरूआत की. राजघाट पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी पहुंचे और विपक्ष से एकजुट रहने की अपील की. हालांकि मंच पर सपा-बसपा के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे.
पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. कुछ राज्यों में पेट्रोल के दाम 80 रुपये को पार गए हैं जो अब तक की सबसे ज़्यादा क़ीमत है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.50 रुपये और डीज़ल की कीमत 72.60 रुपये प्रति लीटर हो गई है. बिहार में पेट्रोल के दाम इससे भी ज़्यादा हो गए हैं.
झारखंड में बंद को लेकर सभी वाम पार्टियाँ, कांग्रेस, राजद, झारखंड विकास मोर्चा आदि के नेता सड़कों पर उतरे हैं. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बंद को नैतिक समर्थन दिया है. इनके कार्यकर्ता सड़कों पर साथ नहीं आए.
बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ इस बंद को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि ‘डीज़ल और पेट्रोल के दाम वैश्विक कारणों ये बढ़ रहे हैं. सरकार जनता की परेशानी देख रही है और इसके लिए उपाय भी करेगी. लेकिन, सरकार में आर्थिक फ़ैसले ज़रूरत के हिसाब से लिए जाते हैं न किसी राजनीतिक दबाव में.’
उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि उन्होंने साल 2013 में पेट्रोलियम की क़ीमतों पर सब्सिडी दी तो उसके लिए बजट में प्रावधान क्यों नहीं किया. उन्होंने 1 लाख 40 हजार करोड़ के ऑयल बॉण्ड जारी कर दिए. अब 2024 तक आठ प्रतिशत ब्याज की दर से सरकार को उसे वापस करना है.

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