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पंजाब में सीएम – गवर्नर की आपसी जंग में पिस रहें 36 हजार कर्मचारी 

पंजाब में मुख्यमंत्री और गवर्नर की आपसी जंग में 36000 कर्मचारी पिस रहे हैं। यह कर्मचारी वह है जो सरकार के संस्थानों में काम करते हैं। लेकिन वह वर्षों से रेगुलर नहीं हुए हैं।
 फिलहाल, पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने उनके रेगुलर होने के लिए कानून पास कर दिया है। इससे 36000 कर्मचारियों में पक्का होने की उम्मीद जग गई। लेकिन फाइल गवर्नर हाउस में जाकर रूक गई है।
यह फाइल पंजाब के गवर्नर बी एल पुरोहित ने रोक दी है।  पंजाब के गवर्नर बीएल पुरोहित ने यह फाइल रोकने की वजह बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके पास फाइल 20 दिन देरी से भेजी। यही नहीं बल्कि उन्होंने 36000 कर्मचारियों के पक्का होने की बाबत 6 सवाल सरकार से किए।  लेकिन उनका जवाब नहीं मिला। जिसके चलते फाइल रुकी हुई है। हालांकि, प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है। वह कहते हैं कि भाजपा नहीं चाहती कि प्रदेश के 36000 कर्मचारी रेगुलर हो जाएं ।जिसके चलते ही प्रदेश के गवर्नर कर्मचारियों की फाइल में अड़ंगा बाजी कर रहे हैं।
 यही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस मामले पर यह ऐलान कर दिया है कि अगर गवर्नर ने उनकी फाइल पास नहीं की तो वह धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। इस धरने प्रदर्शन में उनके साथ सरकार के मंत्री भी होंगे। गौरतलब है कि पंजाब में 2 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसके मद्देनजर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का यह दाव उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। दूसरी तरफ सत्तासीन पार्टी के नेताओं का कहना है कि भाजपा नहीं चाहती कि 36000 कर्मचारियों को पक्का करके मुख्यमंत्री अपनी वोट भी पक्की कर ले। इसके कारण ही भाजपा के दबाव में प्रदेश के गवर्नर बीएल पुरोहित ने फाइल रोक दी है।

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