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बंगाल में BJP पर सिर मुडाते ही पड़े ओले, टिकट वितरण से कलह

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी शुरू से ही गंभीरता पूर्वक प्रचार कमान संभाले हुए हैं। भाजपा के मिशन पश्चिम बंगाल का लक्ष्य इस से जाना जा सकता है कि यहां प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष दौरे पर दौरे कर रहे हैं। आए दिन भाजपा नेताओं के दौरे देखकर लग रहा था कि पार्टी इस राज्य में अपनी सरकार लाने के लिए पूरी तैयारियों में जुटी है।

लेकिन कुछ दिन पहले हुए पार्टी के टिकट वितरण को देखें तो इसके उलट दिखाई दे रहा है ।पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जिस तरह से आनन-फानन में टिकट वितरण किए है, उससे पार्टी कलह का शिकार हो गई है। इसकी वजह पार्टी ने टिकट देने से पहले गंभीरता पूर्वक अध्ययन नहीं किया।

याद रहे कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक 200 से अधिक उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। जिसमें भाजपा ने केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ ही कई राज्यसभा, लोकसभा के सांसदों को भी मैदान में उतारा है। इनमें मुकुल राय, लॉकेट चटर्जी, शुभेदु अधिकारी, सपन दास गुप्ता जैसे सीनियर लीडर भी चुनाव लड़ने की लिस्ट में शामिल है ।

इससे पहले भाजपा चार वर्तमान सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे चुकी है। जिस पर टीएमसी ने भाजपा को जमकर घेरा है। टीएमसी ने कहा है कि भाजपा के पास चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त उम्मीदवार भी नहीं है। इसलिए भाजपा सांसदों को विधायक का चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे रही है।

यही नहीं बल्कि उम्मीदवारों की लिस्ट में ऐसे कई चेहरे हैं जो चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने टीएमसी से कुछ दिन पहले ही शामिल हुए नेताओं को टिकट देकर अपनी पार्टी के पुराने नेताओं को नाराज कर दिया है। वह सभी नेता अब धरना प्रदर्शन पर उतारू है । मजे की बात यह है कि भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं तक को विधानसभा के टिकट बांट दिए। जिनमें बंगाल के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा की पत्नी शिखा मित्रा भी शामिल है ।

भाजपा ने शिखा मिश्रा का विधानसभा टिकट घोषित कर दिया। इस पर कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी ने शिखा मिश्रा को फोन किया और हकीकत जानी। दूसरी तरफ शिखा मित्रा का कहना है कि वह अभी भी कांग्रेस के साथ है। अपने टिकट वितरण पर हैरानी जताते हुए शिखा मित्रा ने कहा कि उन्होंने तो पहले ही कह दिया था कि वह चुनाव नहीं लड़ेगी। फिर भी बिना पूछे उन्हें टिकट दिया गया। शिखा मित्रा ने यहां तक कहा कि मैं कोई चुनाव नहीं लड़ रही हूं और भाजपा से तो एकदम नहीं।

यही नहीं बल्कि कई ऐसे नेताओं को टिकट दे दिए गए जिन्होंने चुनाव लड़ने से ही मना किया हुआ था। ऐसे दो उम्मीदवार सामने आए हैं। इस तरह देखा जाए तो चुनाव होने से पहले ही भाजपा अपने ही अंतर्द्वंद में फंसती नजर आ रही है।

इस पर टीएमसी के सांसद महुआ मोइत्रा में तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा दो सप्ताह बाद अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर रही है। उनमें से कुछ बीजेपी में ही नहीं है। कुछ को पता ही नहीं है कि टिकट भी मिला है। अमित साह को कुछ तैयारी करनी चाहिए थी। फिलहाल , भाजपा के टिकट वितरण पर संकट उस समय छाया जब पार्टी के कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई।

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