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शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में चीन विवाद पर किया PM मोदी की आलोचना

'मन की बात' में PM मोदी बोले- भारतीय सेना ने लद्दाख में चीन को दिया करारा जवाब

भारत-चीन सीमा पर सोमवार को हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। इस मामले पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सामना में लिखा है, “अगर कोई विरोध नहीं होता है, तो इससे मोदी की छवि को चोट पहुंचेगी। भारत की सीमा के किसी भी राष्ट्र के साथ हमारे शांतिपूर्ण संबंध नहीं हैं और यह आश्चर्य की बात है कि हमारे शासकों ने दुनिया को जीतने के लिए निर्धारित किया है। नेपाल ने भारत के नक्शे को काट दिया है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान का मजाक जारी है।”

सामना ने लिखा है कि चीन एक धोखेबाज और करामाती देश है लेकिन अगर नेपाल भी भारत की ओर टेढ़ी नजर से देख रहा है, अगर वह चुनौती की भाषा का उपयोग कर रहा है, तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमारा देश, जो एक विश्व नेता, महाशक्ति, आदि बनने की कोशिश कर रहा है, अच्छी स्थिति में नहीं है। संपादकीय में केंद्र सरकार पर जमकर आलोचनाओं के तीर चलाए गए हैं।

गौरतलब है कि सोमवार रात पूर्वी लद्दाख में गैलवान घाटी सीमा पर चीन और भारत के बीच हुए झड़प में 20 सैनिक शहीद हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। हम जवाब देने में सक्षम हैं। ये सही है फिर भी क्या वास्तव में गाल्वन घाटी में हुआ, चीनी सीमा पर वास्तव में क्या हो रहा है, जनता को अभी तक नहीं बताया गया है।

सामना ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अगर बिना किसी हथियार, बंदूक, मिसाइल, टैंक के दोनों तरफ इतना बड़ा सैन्य नुकसान होता है, तो रक्षा उत्पाद, परमाणु बम क्यों बनाए जाएं? हम पाषाण युग की लड़ाइयों में एक-दूसरे की जान ले रहे हैं। लद्दाख की सीमा पर भी यही देखा जाता है। मोदी के प्रधान मंत्री बनने के बाद से छह वर्षों में कई बार यह दावा किया गया है कि देश मजबूत और अधिक उग्रवादी बन गया है, लेकिन इस समय के दौरान पाकिस्तान, नेपाल और अब चीन ने भारत पर सीधे हमले किए हैं।

ट्रम्प और चीन के बीच झगड़ा कोरोना के प्रसार के साथ शुरू हुआ, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका चीनी मिसाइलों के मंच पर नहीं आ रहा है। हम यह नहीं भूल सकते कि हमारा देश आ रहा है और चीन हमारा पड़ोसी देश है। इसीलिए पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, वाजपेयी ने जलती हुई सीमा को शांत रखने की कोशिश की। सीमा संघर्ष के लिए देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

सार्वजनिक रूप से तालियां बजाकर कहा जाएगा कि चीन के साथ चल रहे संघर्ष का मूल और मूल हिस्सा पंडित नेहरू की धोखेबाज विदेश नीति का हिस्सा है, लेकिन यह मोदी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सैनिकों के बलिदान को रोक दे। गंदगी सीमा में नहीं बल्कि दिल्ली में है। दिल्ली की सरकार कमजोर है, इसलिए दुश्मन सीमा पर हमला कर रहा है, छह साल पहले नरेंद्र मोदी ने कहा था। इसलिए मोदी को आज जो हुआ है उसका विरोध करना होगा।

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