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पश्चिम उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा किसान आंदोलन का प्रभाव, भाकियू-लोकदल ने मिलकर बिंगाड़े भाजपा के समीकरण

26 जनवरी से पहले किसान आंदोलन का केंद्र सिंधु बॉर्डर हुआ करता था। तब पूरे देश की नजर सिंधु बॉर्डर पर लगी रहती थी । हालांकि सिंधु बॉर्डर के अलावा टिकरी बॉर्डर, चील्ला बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर भी किसान नेताओं ने आंदोलन किया हुआ था । लेकिन आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए सिंधु बॉर्डर पर भारी भीड़ जुट रही थी ।

इसी दौरान 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली में अचानक रुख मोड़ दिया। रैली की परेड में हालांकि हिंसा हुई । लेकिन इस हिंसा के बाद किसान आंदोलन में यकायक नरमी आने लगी। इसके मद्देनजर ही कहा जाने लगा था कि अब आंदोलन अंतिम चरण में है । गाजीपुर बॉर्डर आंदोलन की ही बात करें तो यहां के किसान आंदोलनकारी नेता बहुत कम संख्या में रह गए थे ।

यहां तक की भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने यह भी घोषणा कर दी थी कि जब गाजीपुर बॉर्डर पर बिजली और पानी काट दिया गया है तो ऐसे में वहां रहना उचित नहीं है। नरेश टिकैत का कहने का मतलब साफ था कि उनके अनुज राकेश टिकैत के नेतृत्व में चल रहे गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन को समेटने की तैयारी हो गई थी ।

लेकिन 28 जनवरी की शाम को राकेश टिकैत की आंखों से निकले आंसू ने पासा ही पलट दिया । मीडिया के सामने चलते हैं भावुक होकर रोने लगे तो अचानक ही किसानों की भावनाएं जाग उठी। पूरे देश का किसान राकेश टिकैत के साथ हो लिया । इनमें सबसे पहले पश्चिम उत्तर प्रदेश का किसान राकेश टिकैत के समर्थन में आया ।

टिकैत के आंसू देख कर सबसे पहले राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजीत सिंह पिघले। अजीत सिंह के पुत्र पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने ना केवल ट्वीट किया बल्कि राकेश टिकैत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर किसान आंदोलन में साथ देने का वादा किया।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राकेश टिकैत और चौधरी अजीत सिंह में बिल्कुल नहीं बनी थी। जिसके चलते टिकैत ने चौधरी अजीत सिंह के उम्मीदवारों को समर्थन नहीं किया था। इस बात की टीस चौधरी अजीत सिंह के अंदर थी । लेकिन 28 की रात ही अजीत सिंह की यह टिस खत्म हो गई।

उसके बाद अगले दिन मुजफ्फरनगर में हुई पंचायत में चौधरी अजीत सिंह के पुत्र जयंत चौधरी भी शामिल हुए। इस दौरान जयंत चौधरी ने राकेश टिकैत के साथ पुराने गिले-शिकवे दूर कर नए समीकरण बनाने के संकेत दे दिए । यहां तक कि जयंत चौधरी ने लोटा पानी की बात भी कह दी ।

इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो किसान नेताओं चौधरी अजीत सिंह और राकेश टिकैत एक दूसरे के साथ आ मिले । दोनों किसान नेताओं का यह मिलन भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है । भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के समर्थन की वजह से दर्जनों सीट पा गई थी । अब 2022 के विधानसभा चुनाव में ऐसा होना मुमकिन नजर नहीं आ रहा है।

किसान आंदोलन ने निष्क्रिय पड़े चौधरी अजीत सिंह और उनके संगठन में जान डालने का काम किया है। फिलहाल, राष्ट्रीय लोक दल सक्रिय हो चुका है । कयास लगाए जा रहे हैं कि चौधरी अजीत सिंह और राकेश टिकैत की यह जुगलबंदी भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

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