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अगर आप लोगों की आवाज बन गये हैं तो आप रवीश कुमार बन गये हैं

शौक़-ए-दीदार हो तो नज़र पैदा कर, रवीश कुमार को रैमॉन मैगसेसे अवार्ड मिलना वह भी उस दौर में जब मीडिया में यह अंतर कर पाना मुश्किल है कि कौन चाटुकार हैं और कौन पत्रकार है सच में यह पत्रकारों के आत्ममंथन का क्षण हैं। हमें रवीश कुमार से यह सीखना चाहिए कि सिर्फ चिल्लाना और टीआरपी की दौर में अव्वल रहना ही पत्रकारिता नहीं है।

एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार को वर्ष 2019 के रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रैमॉन मैगसेसे पुरस्कारए एशिया के व्यक्तियों और संस्थाओं को अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार फिलीपींस के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है। रवीश कुमार ने पत्रकारिता जगत में संघर्ष का एक लंबा सफर तय किया है और वह इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा सफल चेहरों में से एक हैं। अपनी सफलता को लेकर रवीश अक्सर कहते हैं कि ये कोई खास बात नहीं है कि मैं अब सफल हो गया हूं क्योंकि मेरे जैसे रोज लाखों लोग अपनी शुरुआत शून्य से ही करते हैं। हर रोज कोई गांव से शहर आ रहा हैए कोई शहर से अमेरिका जा रहा है और कोई अमारिका से मलेशिया जा रहा है। मैंने पहले पलायन का मतलब भागना होता है समझ था पर जब मैं दिल्ली आया तो मुझे लगा पलायन मतलब नई संभावनाओं की तलाश करना होता है। संभावनाओं की तलाश करते-करते मैं कब रिपोर्टर बना, कब एंकर और कब लेखक यह सब पता ही नहीं चला।

नमस्कार! मैं रवीश कुमार बोल रहा हूं। हाथ में लाल माइक लिए जब यह व्यक्ति रिपोर्टिंग करने निकलते हैं तो हर किसी को ऐसा लगता है कि जैसे बेआवाजों को आवाज मिल गई हो। 5 दिसंबर 1974 को बिहार के मोतिहारी में जन्मे रवीश कुमार जब पहली बार 1996 में एनडीटीवी के ऑफिस आए तो बकौल रवीश कुमार उन्हें यह ऑफिस नासा के किसी अनुसंधान केन्द्र से कम नहीं लग रहा था। बड़े कैमरे, मॉनिटर, माइक, डेस्क आदि देखना उन्हें किसी सपने से कम नहीं लग रहा था। लेकिन आज रवीश कुमार भारत के ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला हैए इससे पहले 1961 में अमिताभ चौधरी को 1975 में बीजी वर्गीज को 1982 में अरुण शौरी को 1984 में आर के लक्ष्मण को और 2007 में पी साईनाथ को यह पुरस्कार मिल चुका है।

रवीश कुमार के अलावा वर्ष 2019 रैमॉन मैगसेसे अवार्ड के चार अन्य विजेताओं में म्यांमार से को स्वे विन, थाईलैंड से अंगखाना नीलापजीत, फिलीपींस से रेमुंडा पुजांते और दक्षिण कोरिया से किम जोंग भी शामिल हैं। रवीश कुमार के बारे में पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है। रैमॉन मैगसेसे अवॉर्ड फाउंडेशन ने इस संबंध में कहा “रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइमटाइम’ आम लोगों की वास्तविक अनकही समस्याओं को उठाता है। साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया ‘अगर आप लोगों की आवाज बन गए हैं तो आप पत्रकार हैं।’रवीश कुमार को इससे पहले भी पत्रकारिता से संबंधित कई पुरस्कार मिल चुके हैं जिनमें 2010 में गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, 2013 में रामनाथ गोयनका पुरस्कार, कुलदीप नैयर पुरस्कार आदि शामिल है। 2016 में जब इंडियन एक्सप्रेस ने 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की सूची बनाई थी तो रवीश कुमार उनमें से एक थे।

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